देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की वीवीआईपी सुरक्षा विंग का दायरा बढ़ाया जा रहा है। वजह, एसपीजी के बाद देश में अति विशिष्ट लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने की बड़ी जिम्मेदारी 'सीआरपीएफ' ही निभा रही है। पहले सीआरपीएफ की वीवीआईपी सिक्योरिटी विंग में छह बटालियन थी, अब इनकी संख्या सात की जा रही है। झारखंड से एक बटालियन को वीवीआईपी सिक्योरिटी विंग में शामिल किया जा रहा है। इस तरह से अब सिक्योरिटी विंग में लगभग सात हजार जवान रहेंगे। मौजूदा समय में सीआरपीएफ द्वारा करीब 220 वीवीआईपी को सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। इतना ही नहीं, सीआरपीएफ को 'एनएसजी' हब और कैंप परिसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई है।
सीआरपीएफ कर रही इतने लोगों की सुरक्षा
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह की पत्नी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, उद्योगपति मुकेश अंबानी, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, स्वामी रामदेव, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सांसद असदुद्दीन ओवैसी सहित 220 से ज्यादा वीवीआईपी को सीआरपीएफ द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। सीआरपीएफ की विभिन्न सुरक्षा श्रेणियों में जेड प्लस सुरक्षा के अलावा एक्स, वाई, वाई प्लस और जेड श्रेणी के तहत भी अनेक लोगों को बल की सुरक्षा प्रदान की गई है।
'एनएसजी' परिसर की सुरक्षा में भी सीआरपीएफ कमांडो
अब 'नेशनल सिक्योरिटी गार्ड' के ब्लैक कैट कमांडो की सुरक्षा भी सीआरपीएफ को सौंपी गई है। एनएसजी कमांडो के जितने भी सेंटर/कैंप हैं, उन सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी जा रही है। पिछले साल वीआईपी सुरक्षा से एनएसजी कमांडो को पूरी तरह हटाने पर सहमति बनी थी। जिन नौ अति विशिष्ट लोगों के पास एनएसजी सुरक्षा है, उन्हें सीआरपीएफ सिक्योरिटी मुहैया कराई जाएगी। नौ अति विशिष्ट लोगों के पास नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के ब्लैक कैट कमांडो हैं, उनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं।
संसद भवन से हटे पीडीजी अब बना वीएसजी
गत वर्ष संसद भवन की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के पीडीजी ग्रुप को हटा दिया गया था। वहाँ की सुरक्षा, सीआईएसएफ के हवाले कर दी गई। सीआरपीएफ के पीडीजी दस्ते को बल की वीआईपी सुरक्षा विंग में शामिल किया गया है। इस दस्ते में लगभग 1400 जवान थे। अब उन्हें वीआईपी सिक्योरिटी ग्रुप 'वीएसजी' का नाम दिया गया है। फिलहाल, एनएसजी के पांच क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और गांधीनगर हैं। इसके अतिरिक्त अयोध्या, पठानकोट और केरल में भी एनएसजी की इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि एनएसजी हब, कैंप या शिविर की सुरक्षा, सीआरपीएफ को सौंपी जाने की तैयारी हो रही है।
सीआरपीएफ कमांडो की खासियत
अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ कमांडो बहादुरी के कई कारनामों में दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। विश्व की सबसे विशिष्ट फोर्स ‘कोबरा’ यानी (कमांडो बटालियन फॉर रिसोल्यूट एक्शन) विंग से भी अनेक कमांडो जेड प्लस सुरक्षा में आते रहते हैं। देश में मौजूदा समय में 18 अति विशिष्ट लोगों को सीआरपीएफ द्वारा जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा एक्स, वाई, वाई प्लस और जेड श्रेणी के तहत भी अनेक लोगों को बल की सुरक्षा प्रदान की गई है। साल 2015 में गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राष्ट्र के सामने आए थे। कोबरा यूनिट का गठन करने से पहले यूएस मेरिन कमांडो, उनकी ट्रेनिंग, वर्किंग स्टाइल, सर्जीकल स्ट्राइक और दूसरे कई तरह के ऑपरेशन की जानकारी ली गई। इन सबके बाद ही कोबरा यूनिट स्थापित हुई थी। यह विशिष्ट कमांडो फोर्स जंगल में बिना किसी मदद के 11 दिन तक लड़ सकती है। इसी वजह से कोबरा विश्व में पहले स्थान पर है।
कमांडो को दी जा रही है इस तरह की ट्रेनिंग
नक्सलियों, आतंकियों से लड़ने, वीवीआईपी सुरक्षा और दूसरे बड़े ऑपरेशनों के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है। हथियार, वर्दी एवं तकनीकी उपकरणों के मामले में भी 'कोबरा' दूसरे सभी बलों से पूरी तरह अलग हैं। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है। अमेरीकी मरीन कमांडो बिना किसी मदद के जंगल में लगातार तीन रातों तक लड़ सकते हैं, लेकिन सीआरपीएफ के हर कोबरा कमांडो के लिए ट्रेनिंग के दौरान सात दिन तक जंगल में लड़ने की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई साल पहले कोबरा ने सारंडा (झारखंड) के घने जंगलों में 11 दिन तक बिना किसी सहायता के एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। वजन लेकर घने जंगल में नियमित रूप से लड़ते रहने का रिकॉर्ड ब्रिटेन के विशिष्ट कमांडो दस्ते 'एसएएस' के नाम पर है। यह दस्ता 30 किलो वजन उठाकर दस रातें जंगल में गुजार सकता है, जबकि कोबरा 23 किलो वजन के साथ 11 रातों तक गहन जंगल से गुजरने में समर्थ हैं।
सीआरपीएफ कमाडों को मिलते हैं ये हथियार
यूएस मरीन कमांडो की तर्ज पर सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो को भी मरपट (मेरिन पैटर्न) वर्दी मिलती है। यानी इसमें सभी तरह के तकनीकी उपकरण लगे होते हैं। वीवीआईपी सुरक्षा और विभिन्न ऑपरेशन करने में निपुण कोबरा कमांडो को यूएस आर्मी जैसा पैसजट (पर्सनल आर्मर सिस्टम-ग्राउंड टू्रप्स) हेलमेट, यूएस के एम-1 हेलमेट और जर्मन आर्मी के ‘स्टेहेलम’ हेलमेट मुहैया कराए जाते हैं। ये कमांडो इजराइल निर्मित एमटीएआर व एक्स-95 राइफल जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं। कमांडो के पास जीपीएस के अलावा रात को दिखने में मदद करने वाला चश्मा होता है। अब इन्हें जैमर और बुलेट प्रूफ तकनीक मुहैया करा दी गई है। वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात होने वाले जवानों को नोएडा में ट्रेनिंग दी जाती है। दो माह की प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग में जवानों को वीवीआईपी सुरक्षा, भवनों या किसी विशेष स्पॉट की हिफाजत से संबंधित हर बारीकि से अवगत कराया जाता है। इस दौरान जवानों को कई तरह की परीक्षा पास करनी होती है। उसके बाद ही उन्हें वीवीआईपी सुरक्षा यूनिट का हिस्सा बनाया जाता है। सीआरपीएफ जवानों की खासियत है कि ये किसी भी परिस्थिति में काम कर सकते हैं।