देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 2250 शूरवीरों ने राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। दूसरी तरफ इस बल के योद्धाओं ने विभिन्न मोर्चों पर वीरता के 2469 पदक हासिल किए हैं। सीआरपीएफ को मिले पदकों की यह संख्या, सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सर्वाधिक हैं। 27 जुलाई को बल का 85वां स्थापना दिवस मनाया गया। सीआरपीएफ डीजी डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पहुंचकर, कर्तव्य के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बल के 2250 शूरवीरों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें सेल्यूट किया।
बल के 60 शूरवीरों को मिला सम्मान
देश में बल के सभी संस्थानों में सीआरपीएफ का 85वां स्थापना दिवस समारोह बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया गया। पूरा राष्ट्र इसका गवाह बना है। शौर्य अधिकारी संस्थान, वसंत कुंज में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में तपन कुमार डेका, निदेशक, आईबी, मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने सीआरपीएफ महानिदेशक डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन के साथ बल की समृद्ध और प्रचलित परंपरा के अनुरूप वीरता पदक विजेताओं को सम्मानित करते हुए वीर नायकों और मरणोपरांत वीर शहीदों के परिवार के सदस्यों को वीरता पदक प्रदान किए। इस समारोह में 60 शूरवीरों को पदक प्रदान किए गए और वीरता पदकों का संक्षिप्त उद्धरण प्रस्तुत किया।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 2250 शूरवीरों ने राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। दूसरी तरफ इस बल के योद्धाओं ने विभिन्न मोर्चों पर वीरता के 2469 पदक हासिल किए हैं। सीआरपीएफ को मिले पदकों की यह संख्या, सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सर्वाधिक हैं। 27 जुलाई को बल का 85वां स्थापना दिवस मनाया गया। सीआरपीएफ डीजी डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पहुंचकर, कर्तव्य के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बल के 2250 शूरवीरों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें सेल्यूट किया।
देश में बल के सभी संस्थानों में सीआरपीएफ का 85वां स्थापना दिवस समारोह बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया गया। पूरा राष्ट्र इसका गवाह बना है। शौर्य अधिकारी संस्थान, वसंत कुंज में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में तपन कुमार डेका, निदेशक, आईबी, मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने सीआरपीएफ महानिदेशक डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन के साथ बल की समृद्ध और प्रचलित परंपरा के अनुरूप वीरता पदक विजेताओं को सम्मानित करते हुए वीर नायकों और मरणोपरांत वीर शहीदों के परिवार के सदस्यों को वीरता पदक प्रदान किए। इस समारोह में 60 शूरवीरों को पदक प्रदान किए गए और वीरता पदकों का संक्षिप्त उद्धरण प्रस्तुत किया।
बल ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर सीआरपीएफ कर्मियों के मेधावी बच्चों को उनकी शैक्षणिक श्रेष्ठता को सम्मानित और प्रेरित किया। श्री तपन कुमार डेका, निदेशक आईबी और डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन, महानिदेशक सीआरपीएफ ने विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सीआरपीएफ कर्मियों के मेधावी बच्चों को महानिदेशक की ट्रॉफी, योग्यता प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किया। दिन की शुरूआत में डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन ने कर्तव्य के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बल के 2250 शूरवीरों को अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। तपन कुमार डेका ने कहा, सीआरपीएफ ने अपनी बहुमुखी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को पेशेवर तरीके से निभाया है। सीआरपीएफ एक ऐसा विशेष बल है जिसे राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा से संबंधित कई प्रतिकूल समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने का काम सौंपा गया है। इस बल ने सदा ही 'सेवा और निष्ठा' के अपने वाक्य का पालन करते हुए देश का विश्वास हर मोर्चे पर जीता है।
डॉ. सुजॉय लाल थाउसेन, सीआरपीएफ, महानिदेशक ने कहा, बल ने अपने अस्तित्व के 84 गौरवशाली वर्षों में हमेशा अनुकरणीय साहस और वीरता का प्रदर्शन किया है। इसके चलते बल को 2469 वीरता पदकों से सम्मानित किया गया है, जो सभी सीएपीएफ में सबसे अधिक हैं। वर्ष 1939 में नीमच में एक बटालियन से शुरूआत करते हुए अब देश के सम्पूर्ण भागों में सीआरपीएफ की 246 बटालियनों तैनात होने के साथ यह सबसे बड़े बल के रूप में विकसित है। अपने अस्तित्व के 84 वर्षों में बल के बहादुरों द्वारा प्रदर्शित अदम्य साहस, अभूतपूर्व धैर्य और अनुकरणीय वीरता के अनेकों उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं। बल ने लगातार विकसित होने वाली आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से और सफलतापूर्वक सामना किया है। यह बल स्वतंत्र भारत की क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस से लेकर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के संरक्षक तक की असाधारण शानदार और अद्वितीय यात्रा का सजीव प्रमाण है। सीआरपीएफ अपनी सर्वोत्तम परंपराओं में 'सेवा और निष्ठा' के अपने पवित्र वाक्य को साकार करते हुए निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा करने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराता है। बल की क्षमता और प्रतिबद्धता में अपना विश्वास प्रदान करने के लिए राष्ट्र के प्रति अपना आभार व्यक्त करता है।