पिछले दिनों सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह की तरफ से एक स्टेंडिंग ऑर्डर यानी स्थायी आदेश जारी किया गया है। इसमें बल के सभी कार्मिकों के लिए पीटी/परेड एवं खेल कूद अनिवार्य कर दिया गया। मकसद, फोर्स के कार्मिकों का स्वास्थ्य बेहतर बनाना है। सीआरपीएफ एक 'फिट फोर्स' तथा अधिक सशक्त 'फाइटिंग फोर्स' के रूप में स्थापित रहे, इसके लिए 19 अगस्त से बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अभियान भी प्रारंभ किया गया है। पीटी/परेड और खेल कूद का आदेश, सीआरपीएफ के अस्पताल, मिनिस्ट्रियल, ट्रेड्समैन, सिग्नल, अभियंता स्टाफ और अन्य तकनीकी पदों पर तैनात कार्मिकों को रास नहीं आ रहा। इस संबंध में डीजी को एक पत्र भेजा गया है। हालांकि पत्र पर भेजने वाले का नाम नहीं लिखा है, लेकिन उसमें वे सभी बातें लिखी हैं कि उक्त कार्मिकों को पीटी/परेड या योग से क्यों दूर रखा जाए। इतना ही नहीं, पीटी/परेड न करनी पड़े, इसके लिए 'लेबर लॉ' और 'कार्य समय' का हवाला भी दे दिया गया।
पीटी परेड व खेल कूद से मुक्त रखा जाए
सीआरपीएफ के अस्पताल, मिनिस्ट्रियल, ट्रेड्समैन, सिग्नल, अभियंता स्टाफ और अन्य तकनीकी पदों पर तैनात कार्मिकों की तरफ से डीजी को एक पत्र भेजा गया है। इसका विषय पीटी/परेड एवं खेल कूद है। इस पत्र में कहा गया है कि अस्पताल, मिनिस्ट्रियल, तकनीकी एवं अभियंता स्टाफ के कार्य की प्रकृति को देखते हुए इनके कार्मिकों को पीटी परेड व खेल कूद से मुक्त रखा जाए। पत्र भेजने वाले ने वैकल्पिक व्यवस्था भी बताई है।
पत्र के पहले प्वाइंट में कहा गया है कि सीआरपीएफ, देश की आंतरिक सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने वाला एक प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल है।
बल में दो तरह के कार्मिक होते हैं
इसमें दो प्रकार के कार्मिक होते हैं। एक ऑपरेशनल कार्मिक और दूसरे मिनिस्ट्रियल कार्मिक (अस्पताल, मिनिस्ट्रियल, तकनीकी एवं अभियंता स्टाफ सहित)। ऑपरेशनल कार्मिक फील्ड ड्यूटी, नक्सल विरोधी अभियान, कानून व्यवस्था, एवं सुरक्षा संचालन में लगे रहते हैं। मिनिस्ट्रियल कार्मिक मुख्य तौर पर प्रशासनिक और दफ्तर से संबंधित कार्यों का निर्वहन करते हैं। इन कार्मिकों का कार्यक्षेत्र/दायित्व, दस्तावेजों का संधारण, पत्राचार, पेरोल, वेतन भत्तों की देखरेख, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन, रिकॉर्ड प्रबंधन, बल के कार्मिकों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य की जांच, देखभाल, उपचार करना, बल की तकनीकी आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा बल के रहन सहन की उचित व्यवस्था करना इत्यादि है।
नियुक्ति का बताया ये आधार
पत्र में लिखा है कि इनकी नियुक्ति मूल रूप से क्लेरिकल, आयुष, तकनीकी एवं बौद्धिक कार्यों के लिए की जाती है। इनकी भर्ती प्रक्रिया एवं बुनियादी प्रशिक्षण में भी उनके विशेषीकृत कार्यों को देखा जाता है। इनका चयन केवल, शारीरिक दक्षता के आधार पर नहीं होता। शारीरिक दक्षता के रूप में केवल सामान्य जांच/परीक्षण किया जाता है। उपरोक्ता कार्मिकों का मुख्य ध्येय बल के अन्य कार्मिकों को बुनियादी सुविधाएं जैसे कि मासिक वेतन, भत्ते, पेंशन, प्रमोशन, चिकित्सीय सुविधाएं एवं खाने तथा रहने के लिए स्थान उपलब्ध कराना है। इसका मकसद, बल के मुख्य लड़ाकू सदस्यों को परिचालन या अन्य ड्यूटी में कोई असुविधा न हो। पत्र में यह भी लिखा है कि सीआरपीएफ में पीटी परेड, सुबह शाम होती है। इससे जवानों की शारीरिक फिटनेस बनी रहती है। वे ऑपरेशनल कार्यों के लिए सदैव तैयार रहते हैं।
ऑपरेशनल कार्मिकों के लिए जरूरी है पीटी परेड
पत्र में लिखा है कि यह परेड, ऑपरेशनल कार्मिकों के लिए आवश्यक एवं अनिवार्य है, लेकिन मिनिस्ट्रियल स्टाफ के लिए इसे अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है। इसे वैकल्पिक / स्वैच्छिक तौर पर रखा जा सकता है। साथ ही कार्यालय में कुर्सी पर बैठे बैठे या खड़े होकर कुछ आसान व्यायाम जैसे कि गर्दन घुमाना, कंधे ऊपर उठाना, हाथों को ऊपर करना, पैर घुमाना और धीमी गति से उठना बैठना, इत्यादि के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधर सकता है।
इन्हें क्यों पीटी/परेड से मुक्त रखें
- पत्र में इस बाबत कार्य प्रकृति का अंतर बताया गया है। ऑपरेशनल जवानों का मुख्य क्षेत्र फील्ड ड्यूटी है। उनके लिए शारीरिक प्रशिक्षण आवश्यक है। मिनिस्ट्रियल स्टाफ को मानसिक चुस्ती और सटीकता की आवश्यकता होती है। उन्हें दैनिक फील्ड लेवल शारीरिक क्षमता की जरुरत नहीं होती।
- लेबर लॉ एवं कार्य समय का हवाला दिया गया है। सरकारी सेवा के कार्य सामान्यता आठ घंटे निश्चित होते हैं। अगर मिनिस्ट्रियल स्टाफ को सुबह परेड के लिए बुलाएंगे तो वह उनके लिए नियमित वर्किंग आवर्स से बाहर की गतिविधि मानी जाएगी। यह 'अनिवार्य ओवरटाइम' जैसा रूप ले सकता है।
- ये कानूनी दृष्टि से ठीक नहीं है। यह वर्तमान लेबर लॉ के खिलाफ है। ये बात अंतरराष्ट्रीय लेबर संगठन की विभिन्न अभिसमयों का उल्लंघन भी है।
- सीआरपीएफ की भर्ती प्रक्रिया में मिनिस्ट्रियल कार्मिकों को 'कॉम्बटेंट क्लर्क' की श्रेणी में नहीं रखा गया है। उनके लिए अलग से ड्यूटी शेड्यूल बनाया गया है, जिसमें नियमित कार्यालय समय ही लागू होता है।
- श्रम कानूनों के अनुसार, सभी कर्मियों के कार्य करने के घंटे निश्चित होते हैं। अतिरिक्त शारीरिक गतिविधियां, विशेषकर सुबह जल्दी उठकर परेड करना, यह दिनभर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। चिकित्सीय कार्य ठीक से नहीं हो पाते। इन कार्मिकों पर दो या उससे ज्यादा व्यक्तियों का कार्यभार रहता है। ये अपना काम पूरा करने के लिए देर रात तक कार्यालय में बैठते हैं।
- जब किसी कार्मिक को उसकी नियुक्ति के कार्यक्षेत्र से बाहर की ड्यूटी दी जाती है तो उसमें असंतोष और निराशा की भावना उत्पन्न होती है।
- पत्र में लिखा है कि बल के कुछ अधिकारी, नियमों के खिलाफ जाकर अपने मनमुताबिक कार्य कराने के लिए नकारात्मक तौर पर उक्त स्थाई आदेश का दुरुपयोग कर सकते हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर इस स्थाई आदेश का प्रयोग, कार्मिकों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा सकता है।
वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव ...
सीआरपीएफ के अस्पताल, मिनिस्ट्रियल, ट्रेड्समैन, सिग्नल, अभियंता स्टाफ और अन्य तकनीकी पदों पर तैनात कार्मिकों को पीटी परेड से मुक्त रखा जाए। उनकी फिटनेस के लिए वर्ष में एक दो बार मेडिकल चेकअप और बेसिक फिटनेस टेस्ट पर्याप्त होगा। समय समय पर योग, प्राणायाम या हल्की शारीरिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी कराई जा सकती है। ये उनके शारीरिक और मानसिक संतुलन, दोनों के लिए लाभकारी होगी। कुर्सी पर बैठ कर किए जाने वाले व्यायाम भी, कार्मिकों को स्वस्थ रख सकते हैं। दूसरी तरफ ऑपरेशनल ड्यूटी वाले स्टाफ का तर्क है कि पीटी परेड तो सभी के लिए होनी चाहिए। जोखिम वाले क्षेत्रों में तैनात मिनिस्ट्रियल कार्मिकों और ऑपरेशनल जवानों को एक जैसा अतिरिक्त भत्ता मिलता है। जब उन्हें एक जैसा भत्ता मिल रहा है तो सभी को पीटी परेड करने में क्या दिक्कत है।