देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को जम्मू-कश्मीर में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। 'कठुआ' और 'उधमपुर' में लगभग दो दर्जन लोकेशन, जो अभी तक आर्मी के पास थी, अब उन्हें पूरी तरह से सीआरपीएफ के हवाले कर दिया गया है। आर्मी के नियंत्रण वाली लोकेशन एवं ठिकानों पर अब सीआरपीएफ पहुंच रही है। इस दिशा में लंबे समय से 'एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी' पर काम चल रहा था। कई वर्ष पहले 'राष्ट्रीय राइफल' की मारक क्षमता में 'सीआरपीएफ' को लाने के बारे में विचार शुरु हुआ था। इसी के मद्देनजर, पिछले कुछ समय से 'सीआरपीएफ' को सेना के ऑपरेशन पैटर्न पर आगे बढ़ाया जा रहा था। फिलहाल सीआरपीएफ की तीन बटालियनों को, सेना वाली लोकेशन पर तैनात किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ के अधिकारी एवं जवान, आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ज्यादातर ऑपरेशनों में शामिल रहे हैं। इन ऑपरेशनों में सीआरपीएफ के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है। पिछले साल इस केंद्रीय बल को 'व्हील्ड आर्मर्ड एम्फीबियस' जैसे वाहन एवं वॉरफेयर से जुड़े कई दूसरे मॉडर्न उपकरण भी मुहैया कराए गए हैं। उधमपुर और कठुआ जिले, जहां पर सीआरपीएफ द्वारा आर्मी को रिप्लेस किया जा रहा है, वहां लंबे समय से तैयारी चल रही थी।
जम्मू रेंज के डीआईजी के निर्देशन में आर्मी द्वारा कई जगहों का इंफ्रास्ट्रक्चर आदि, सीआरपीएफ के हवाले किया गया है। सीआरपीएफ की 24वीं, 121वीं और 187 वीं बटालियन को सेना के नियंत्रण वाली दो दर्जन लोकेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बटालियनों में सभी रैंकों में विशेष ट्रेंड जवानों और अफसरों को शामिल किया गया है। बल मुख्यालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि ऐसे कार्मिक, जिनका तबादला, उक्त बटालियनों में हुआ है, उन्हें संबंधित यूनिटों से बिना किसी देरी के रिलीव कर दिया जाए। लंबे समय से आतंकियों के खिलाफ अभियानों में शामिल रहे आर्मी, आईबी एवं पुलिस के अधिकारी, उक्त बटालियनों के जवानों एवं अफसरों को 'प्री इंडक्शन ट्रेनिंग' देंगे।
बता दें कि दो तीन वर्ष पहले, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशनों में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स 'आरआर' की संख्या में कुछ कटौती करने के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ था। वहां 'राष्ट्रीय राइफल' की मारक क्षमता में 'सीआरपीएफ' को लाने के बारे में सोचा गया था। उसी के मद्देनजर 'सीआरपीएफ' को सेना के ऑपरेशन पैटर्न पर आगे बढ़ाया गया।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को सीएसआरवी और जेसीबी जैसे बुलेट प्रूफ वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। व्हील्ड आर्मर्ड एम्फीबियस भी सीआरपीएफ को मुहैया कराया गया है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, एकाएक भारतीय सेना को वहां से नहीं हटाया गया है। विभिन्न चरणों में यह प्रक्रिया पूरी हो रही है। सीआरपीएफ की मूल जिम्मेदारी 'आंतरिक सुरक्षा ग्रिड' को मजबूती प्रदान करना है। इसे यह बल, बखूबी तौर पर निभा रहा है। चाहे नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो या आतंकवाद से ग्रस्त इलाका, दोनों जगहों पर सीआरपीएफ ने खुद को साबित कर दिखाया है।
दूसरी तरफ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लगभग 100 कंपनियां जम्मू कश्मीर में तैनात की जा रही हैं। इनमें से अधिकांश कंपनियां वे हैं, जिन्हें अमरनाथ यात्रा के दौरान जम्मू कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया था। अर्धसैनिक बलों की इन कंपनियों में लगभग 85 कंपनियां, देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की रहेंगी। बाकी कंपनियां, बीएसएफ की तैनात की जाएंगी। अर्धसैनिक बलों की इन कंपनियों को जम्मू कश्मीर में तैनात रखने का आदेश, मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद जारी हुआ है। इस तैनाती का मकसद, जेएंडके में सिक्योरिटी ग्रिड को मजबूती प्रदान करना है।