Ministry of External Affairs: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी की सुरक्षा को और पुख्ता करने का फैसला किया गया है। उनके कार्यालय को विशेष तौर पर तैयार भी किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने टेंडर जारी किया है। इसके साथ कई तरह के कड़े निर्देश भी दिए गए हैं।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने राजधानी दिल्ली में मौजूद जवाहरलाल नेहरू भवन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के कमरों में बुलेटप्रूफ कांच लगाने के लिए टेंडर जारी किया है। टेंडर दस्तावेज के अनुसार, इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2.64 करोड़ रुपये है और इसे दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
टेंडर दस्तावेज में दिया गया खास निर्देश
जवाहरलाल नेहरू भवन विदेश मंत्रालय (एमईए) का मुख्यालय है। सुरक्षा कारणों से यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है और यहां वाहनों की आवाजाही अक्सर सीमित रहती है। दस्तावेज में कहा गया है कि काम करने के लिए ठेकेदारों को पहले से पास बनवाने होंगे।
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रैंडम तरीके से चुना जाएग कांच और यहां होगी जांच
सीपीडब्ल्यूडी ने बताया कि बुलेटप्रूफ कांच को यादृच्छिक तरीके (रैंडम) से चुना जाएगा और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल), चंडीगढ़ या गुजरात फॉरेंसिक साइंस लैब, गांधीनगर में इसकी जांच करवाई जाएगी। मंगलवार को टेंडर खोला गया, जिसमें आठ ठेकेदारों ने अपनी बोली लगाई। चयनित ठेकेदार को कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत डिजाइन तैयार कर इंजीनियर-इन-चार्ज से मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही, उसे पूरे काम के लिए पांच साल की गारंटी बॉन्ड देनी होगी।
विदेश मंत्रालय की सुरक्षा को मजबूत करने की कवायद
टेंडर दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि दरवाजे और खिड़की के फ्रेम 1.5 मिमी कोल्ड रोल्ड स्टील शीटसे बनाए जाएंगे। बुलेटप्रूफ कांच पॉलीकार्बोनेट सामग्री से नहीं बनाया जाएगा। ठेकेदार को काम के दौरान सभी फिटिंग्स और सामग्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, जब तक कि भवन औपचारिक रूप से विभाग को सौंपा नहीं जाता।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ठेकेदारों को स्थल और उसके आस-पास का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी परिस्थितियों को समझकर ही अपनी बोली लगाएं। यह कदम विदेश मंत्रालय की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।