पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों की पुलिस द्वारा जांच में प्रगति की कमी पर माकपा के राज्य महासचिव मोहम्मद सलीम ने अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि स्नाइफर कुत्तों के इस्तेमाल से ऐसी घटनाओं की जांच में बेहतर परिणाम मिलेंगे। उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ टीएमसी के साथ एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी ने इसे पुलिस बल का मनोबल गिराने का प्रयास करार दिया है।
दरअसल, सलीम ने शनिवार को बांकुरा में एक जनसभा में विवादास्पद टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्होंने बीरभूम जिले के आरामबाग में एक अन्य रैली में इसी तरह की टिप्पणी की। आरामबाग में उन्होंने कहा कि मैं माफी मांगता हूं कि अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस की क्षमता की तुलना बल द्वारा इस्तेमाल किए गए प्रशिक्षित कुत्तों से करना कुत्तों का अपमान था, क्योंकि वे अपने प्रदर्शन से भरोसा बनाते हैं।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के उप पंचायत प्रमुख की हत्या के मामले में हुई हिंसा में पिछले महीने बोगटुई में आगजनी में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस से बोगटुई में हुए नरसंहार की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इसको लेकर सलीम ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुत्ते निष्पक्ष रूप से काम करेंगे और टीएमसी बीरभूम के जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के कहने पर मामले दर्ज नहीं करेंगे।
इस पर पलटवार करते हुए टीएमसी के राज्य महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि इस तरह की तुलना करना वामपंथियों की आनुवंशिक समस्या है। उन्होंने कहा कि सीपीआई ने अतीत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ इसी तरह की टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि सलीम वामपंथियों की उसी परंपरा को आगे ले जा रहे हैं, जिसने कभी नेताजी पर तोजो का कुत्ता होने का आरोप लगाया था। घोष ने यह भी कहा कि सीपीआई (एम) जितना लोगों से दूर हो रही है, उतना ही ज्यादा वह ऐसी गंदी टिप्पणी कर रही है।
वहीं, भाजपा के राज्य प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाओं ने सलीम को टिप्पणी करने के लिए प्रोरित किया है।