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Covid-19 Bulletin: कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमण का देश में अब तक कोई मामला नहीं

Tue, 22 Dec 2020 10:52 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • देश में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस वार्ता
  • रिकवरी रेट 95 फीसदी से अधिक, सक्रिय मामलों की संख्या तीन लाख से भी कम
  • ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस के नए प्रकार (स्ट्रेन) से भारत अभी तक सुरक्षित
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की ओर से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। यहां स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि करीब 5.5 महीने के बाद देश में कोरोना के तीन लाख से भी कम सक्रिय मामले हैं। वर्तमान में सक्रिय मामलों की संख्या, कुल मामलों के मुकाबले केवल तीन फीसदी है। वहीं, कोरोना से ठीक होने की दर 95 फीसदी से ज्यादा है। कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में बताया गया कि इसका भारत में अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है।

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भूषण ने बताया कि पिछले सात सप्ताहों में देश में रोज सामने आने वाले कोरोना के नए मामलों के औसत में कमी आई है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में सामने आए 57 फीसदी मामले मध्यप्रदेश (1035), तमिलनाडु (1071), छत्तीसगढ़ (1258), पश्चिम बंगाल (1515), महाराष्ट्र (2834) और केरल (3423) में मिले। भूषण ने बताया कि पिछले 24 घंटे में हुई मौतों में 61 फीसदी उत्तर प्रदेश (16), छत्तीसगढ़ (18), दिल्ली (27), केरल (27), पश्चिम बंगाल (41) और महाराष्ट्र (55) में हुईं।

'कोरोना का नया प्रकार अधिक घातक नहीं'

प्रेस वार्ता में मौजूद रहे नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि यह नया स्ट्रेन ज्यादा तेजी से संक्रमित करता है। यह म्यूटेशन बीमारी की गंभीरता को प्रभावित नहीं कर रहा है। डॉ. पॉल ने कहा कि मामले की घातकता इस म्यूटेशन की वजह से प्रभावित नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि चिंता करने की कोई वजह नहीं है, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अभी के लिए हमें सतर्क रहने की जरूरत है।

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन पर वैक्सीनों के असर को लेकर डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अभी तक के लिए हमारे देश में विकसित की जा रहीं कोरोना वायरस की संभावित वैक्सीनों और अन्य देशों में उपलब्ध वैक्सीनों पर इस वायरस के नए प्रकार का कोई असर नहीं देखा गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन अभी तक भारत में नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमण का एक भी मामला अभी तक सामने नहीं आया है।

उपचार के दिशा-निर्देशों में बदलाव नहीं

डॉ. पॉल ने कहा कि ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप से वैक्सीनों के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, अब तक उपलब्ध आंकड़ों, विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन और सतर्क रहना पड़ेगा। हमें समग्र प्रयासों से इस नई चुनौती से निपटना होगा। वायरस के स्वरूप में बदलाव के मद्देनजर उपचार को लेकर दिशा-निर्देश में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि स्वरूप में बदलाव से वायरस ज्यादा संक्रामक हो सकता है। यह जल्दी संक्रमण फैला सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह भी कहा जा रहा है कि यह वायरस 70 गुना ज्यादा संक्रमण फैलाता है। एक तरीके से कह सकते हैं कि यह ‘सुपर स्प्रेडर’ है लेकिन इससे मृत्यु, अस्पताल में भर्ती होने या गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा नहीं बढ़ता है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह तेजी से लोगों में संक्रमण फैलाता है।’
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ब्रिटेन से आए लोगों को लेकर सरकार ने उठाए ये कदम

डॉ. पॉल ने कहा ब्रिटेन में कोरोना वायरस के स्वरूप में बदलाव के मद्देनजर सरकार ने कई कदम उठाए हैं । ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों से संपर्क किया जाएगा और उनकी जांच कराई जाएगी। ब्रिटेन यात्रा पर भी अस्थायी तौर पर रोक लगाई गई है। पॉल ने कहा, ‘एक महत्वपूर्ण फैसले में हमारी निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में हाल में आए वायरस के सभी नमूनों में कल से आनुवांशिक अनुक्रमण का पता लगाया जा रहा है। इसमें आईसीएमआर और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) भी शामिल है।’

पिछले कुछ दिनों में ब्रिटेन से आए लोगों के संबंध में सरकार क्या कदम उठा रही है, इस सवाल पर भूषण ने कहा कि आव्रजन ब्यूरो 25 नवंबर और 23 दिसंबर के बीच ब्रिटेन से आए लोगों के नाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा करेगा। कोरोना वायरस के नए स्वरूप के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय की मंगलवार को जारी एसओपी में कहा गया है कि ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों की आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए और संक्रमित पाए जाने पर उन्हें संस्थानिक पृथकवास केंद्र में भेजना चाहिए।
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