प्रेस वार्ता में मौजूद रहे नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि यह नया स्ट्रेन ज्यादा तेजी से संक्रमित करता है। यह म्यूटेशन बीमारी की गंभीरता को प्रभावित नहीं कर रहा है। डॉ. पॉल ने कहा कि मामले की घातकता इस म्यूटेशन की वजह से प्रभावित नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि चिंता करने की कोई वजह नहीं है, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अभी के लिए हमें सतर्क रहने की जरूरत है।
कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन पर वैक्सीनों के असर को लेकर डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अभी तक के लिए हमारे देश में विकसित की जा रहीं कोरोना वायरस की संभावित वैक्सीनों और अन्य देशों में उपलब्ध वैक्सीनों पर इस वायरस के नए प्रकार का कोई असर नहीं देखा गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में सामने आए कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन अभी तक भारत में नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमण का एक भी मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
डॉ. पॉल ने कहा कि ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप से वैक्सीनों के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, अब तक उपलब्ध आंकड़ों, विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन और सतर्क रहना पड़ेगा। हमें समग्र प्रयासों से इस नई चुनौती से निपटना होगा। वायरस के स्वरूप में बदलाव के मद्देनजर उपचार को लेकर दिशा-निर्देश में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि स्वरूप में बदलाव से वायरस ज्यादा संक्रामक हो सकता है। यह जल्दी संक्रमण फैला सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह भी कहा जा रहा है कि यह वायरस 70 गुना ज्यादा संक्रमण फैलाता है। एक तरीके से कह सकते हैं कि यह ‘सुपर स्प्रेडर’ है लेकिन इससे मृत्यु, अस्पताल में भर्ती होने या गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा नहीं बढ़ता है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह तेजी से लोगों में संक्रमण फैलाता है।’
डॉ. पॉल ने कहा ब्रिटेन में कोरोना वायरस के स्वरूप में बदलाव के मद्देनजर सरकार ने कई कदम उठाए हैं । ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों से संपर्क किया जाएगा और उनकी जांच कराई जाएगी। ब्रिटेन यात्रा पर भी अस्थायी तौर पर रोक लगाई गई है। पॉल ने कहा, ‘एक महत्वपूर्ण फैसले में हमारी निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में हाल में आए वायरस के सभी नमूनों में कल से आनुवांशिक अनुक्रमण का पता लगाया जा रहा है। इसमें आईसीएमआर और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) भी शामिल है।’
पिछले कुछ दिनों में ब्रिटेन से आए लोगों के संबंध में सरकार क्या कदम उठा रही है, इस सवाल पर भूषण ने कहा कि आव्रजन ब्यूरो 25 नवंबर और 23 दिसंबर के बीच ब्रिटेन से आए लोगों के नाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा करेगा। कोरोना वायरस के नए स्वरूप के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय की मंगलवार को जारी एसओपी में कहा गया है कि ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों की आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए और संक्रमित पाए जाने पर उन्हें संस्थानिक पृथकवास केंद्र में भेजना चाहिए।