उनसे जब यह पूछा गया कि क्या इस मुद्दे पर गांगुली को घेरा जाएगा तो, उन्होंने हंसते हुए एक उदाहरण का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को 2013 में स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद हर बैठक से पहले मीडिया लिखता था कि श्रीनिवासन पर नकेल कसी जाएगी लेकिन मैं आपको बता दूं कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।'
खेल मामलों के वकील विदुषपत सिंघानिया भी गांगुली के प्रचार से जुड़े मामले में हितो का टकराव नहीं देखते है। उन्होंने कहा, 'अगर बीसीसीआई के प्रायोजकों ने करार में यह लिखा है कि कोई भी पदाधिकारी व्यक्तिगत क्षमता पर किसी प्रतिद्वंद्वी कंपनी का हिस्सा नहीं हो सकता है, तो हितो के टकराव का मामला बनता है। इस मामले में, मुझे नहीं लगता कि ड्रीम 11 के अनुबंध में इसका जिक्र है।'
बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक, 'कोई भी प्रशासक या उसके निकट संबंधियों को किसी ऐसे कंपनी / संगठन से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिये जिसने बीसीसीआई के साथ वाणिज्यिक समझौता किया है।'