भारत सरकार का मानना है कि मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने की वजह से कोरोना का असर कम हुआ है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के बड़े शहरों में लोगों ने हर्ड इम्यूनिटी हासिल कर ली जिसका अर्थ है कि वायरस ने ग्रामीण क्षेत्रों की ओर फैलना शुरू किया लेकिन इसका असर बेहद कम रहा।
हाल ही के सर्वे में पता चला कि दिल्ली के 56 फीसदी लोगों में कोविड एंटीबॉडी पाए गए जो कि हर्ड इम्यूनिटी के लिए जरूरी 70 फीसदी से काफी कम है।
भारत में केवल 20 फीसदी मौतें के मामले में ही चिकित्सीय प्रमाणपत्र मिलता है, 80 फीसदी मौतों का कोई प्रमाणीकरण नहीं होता। इसके आधार पर विश्लेषक ये भी कह रहे हैं कि भारत में मौतों का आंकड़ा दोगुना या तीन गुना रहा होगा।
भारत से दूसरे सबसे बड़े शहर मुंबई और पुणे में कराए गए एंटीबॉडी सर्वे में सामने आया कि यहां 50 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बन गई। सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोगों में हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो गई जिसने वायरस को ज्यादा कहर मचाने नहीं दिया। वायरस ग्रामीण इलाकों की तरफ भी बढ़ा, लेकिन इसका असर कम रहा।
कम आबादी वाले इलाके में वायरस का असर कम होता है। इसी वजह से यहां मामले लगातार घटते चले गए।
इसके साथ ही ये बात भी सच है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होने की वजह से मामले पहचाने नहीं जा सके। आकड़े बताते हैं कि भारत में रोजाना प्रति 1000 लोगों में सिर्फ 0.5 लोगों का ही स्वाब टेस्ट हुआ था। ये किसी भी देश में जांच का सबसे कम आंकड़ा है।
पिछले साल सितंबर में आए आंकड़ों से पता चलता है कि शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में टेस्ट की संख्या बेहद रही। इस वजह से भी कोरोना के कई मामले पहचान में नहीं आ सके।
भारत में युवाओं की बड़ी आबादी की वजह से भी कोरोना अधिक नहीं फैल पाया। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में औसत आयु 30 वर्ष है और इनमें से सिर्फ 15 फीसदी ही ओवरवेट हैं और 5 फीसदी में ही पहले से किसी तरह का रोग है।
जबकि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अमेरिका में औसत आयु 38 साल है और 32 फीसदी लोग ओवरवेट हैं। इनमें से 36 फीसदी में पहले कोई न कोई बीमारी है।
हालांकि, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति विश्लेषक रिजो जॉन कहते हैं कि कुछ राज्य यह बताने में असमर्थ रहे हैं कि उनके यहां किस तरह के टेस्ट हो रहे हैं। अधिक से अधिक राज्य रैपिड एंटीजन टेस्ट की तरफ बढ़ रहे हैं जिसमें कई मामले गलत (फाल्स नेगेटिव) निकलते हैं। आरटी-पीसीआर का का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
भारत ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए शुरू से ही कड़े कदम उठाए थे। पिछले साल मार्च में ही भारत ने विमानों की आवाजाही रोक दी थी। ब्रिटेन जैसे देशों में जहां कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन सामने आया, वहां विमानों की आवाजाही ट्रैवल कॉरिडोर के जरिए सावधानीपूर्व हुई।
तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजिस्ट जैकब जॉन कहते हैं, भारत में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, टायफाइड, कोलेरा, इंफ्लूएंजा जैसी तमाम बीमारियां मौजूद रहती है जिसने नए वायरस के प्रति एक तरह से इम्यून सिस्टम विकसित कर लिया है।