वैज्ञानिकों को अभी ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि यह वायरस पहले के मुकाबले और अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है या मृत्यु का जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि, कहा जा रहा है कि यह यूके स्ट्रेन से भी अधिक संक्रामक है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने मंगलवार को इस बारे में बताया कि दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में सामने आए कोरोना के स्ट्रेन यूके के स्ट्रेन से अलग हैं।
दक्षिण अफ्रीका में सामने आए कोरोना वायरस के स्ट्रेन को लेकर बीते दिनों वैज्ञानिकों ने एक चेतावनी जारी की थी। वैज्ञानिकों ने कहा था कि एक नए शोध में पता चला है कि यह स्ट्रेन शरीर की एंटीबॉडी के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र को भी 'धोखा' दे सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार शोध में सामने आया है कि इस वायरस के बाहरी स्पाइक प्रोटीन के एक विशिष्ट भाग पर कुछ खास उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) हुए हैं। यही म्यूटेशन इसे एंटीबॉडी से बचने में सक्षम बनाते हैं।
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना वायरस का दक्षिण अफ्रीका का स्ट्रेन उन लोगों को फिर से संक्रमित कर सकता है जो कोविड की चपेट में आकर पहले ही ठीक हो चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के शोधकर्ताओं के अनुसार इस स्ट्रेन से संक्रमित हुए 48 फीसदी लोग पहले भी कोरोना वायारस से संक्रमित हो चुके थे। इसमें हैरान करने वाली बात ये थी कि संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के शरीर में बनी एंटीबॉडी भी नए स्ट्रेन के संक्रमण को नहीं रोक पाई थीं।
इस सवाल का साफ-साफ जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। फाइजर की वैक्सीन यूके स्ट्रेन पर टेस्ट के शुरुआती नतीजों में असरदार पाई गई थी। हालांकि, ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन पर मौजूदा वैक्सीन बेअसर साबित हो सकती हैं। दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में पाए गए स्ट्रेन के स्पाइक प्रोटीन में काफी बदलाव देखे गए हैं। चूंकि यह एंटीबॉडी से बच सकता है तो हो सकता है कि इस स्ट्रेन के लिए वैक्सीन फिर तैयार करनी पड़े।
हालांकि, अभी तक वैज्ञानिक समुदाय का यही मानना है कि मौजूदा वैक्सीन नए स्ट्रेन से निपटने में कारगर साबित होंगी। वायरस के इन नए स्ट्रेन में स्पाइक प्रोटीन में काफी बदलाव हुए हैं। दरअसल, यह वायरस का वह भाग होता है जो इंसान के शरीर की कोशिकाओं से चिपक जाता है। यही वजह है कि ये स्ट्रेन कोशिकाओं को संक्रमित करने और फैलने में अधिक सक्रिय हो गए हैं। बता दें कि भारत में भी इस स्ट्रेन पर वैक्सीन के असर की जांच की जा रही है।