देशभर में लागू लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान मरीजों की संख्या 10 हजार को पार कर गई। 25 मार्च से 320 मरीज दम तोड़ चुके हैं। भले ही विश्व के सबसे बड़े लॉकडाउन की सफलता पर कई लोग सवालिया निशान लगा रहे हों, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत सरकार यह फैसला नहीं लेती तो हालात इससे भी ज्यादा खराब हो सकते थे।
सर गंगा राम अस्पताल के जाने माने लंग सर्जन डॉक्टर अरविंद कुमार कहते हैं कि 21 दिन के लॉकडाउन घोषित करना एक साहसी फैसला था और यह वक्त की जरूरत भी था। अमेरिका, इटली या अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में भारत ने लॉकडाउन लागू करने का फैसला जल्दी लिया। आप उन देशों और हमारे देश में मरीजों की संख्या से स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं।