सैंपल देने के बाद यात्री अपने घर जा सकता है लेकिन सैंपल अगर पॉजिटिव आता है तो उसे जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाएगा। साथ ही, रोगी को लक्षण के आधार पर चिकित्सा परामर्श दी जाएगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 12 साल से छोटे बच्चों की हवाईअड्डे पर कोरोना जांच अनिवार्य नहीं है। एक दिन पहले मंत्रालय ने चीन सहित छह देशों से आने वाले यात्रियों के लिए आरटी पीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की थी।
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शुक्रवार को मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जिन बच्चों की उम्र 12 साल से कम है और वे अपने माता-पिता या किसी अन्य अभिभावक के साथ विदेश से आ रहे हैं तो इन्हें यात्रा से पहले अथवा यात्रा के बाद में किसी भी तरह की जांच में शामिल होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, बच्चों में अगर कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो उन पर वयस्कों जैसे नियम लागू होंगे।
दरअसल, चीन सहित दुनिया के कई देशों में संक्रमण की नई लहर आने के चलते भारत में विदेश यात्रा से लौटने वालों को हवाईअड्डे पर रैंडम जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में शामिल यात्रियों में से दो फीसदी का रैंडम चयन कर उनके सैंपल लिए जा रहे हैं।
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सैंपल पॉजिटिव तो जीनोम सीक्वेंसिंग
सैंपल देने के बाद यात्री अपने घर जा सकता है लेकिन सैंपल अगर पॉजिटिव आता है तो उसे जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाएगा। साथ ही, रोगी को लक्षण के आधार पर चिकित्सा परामर्श दी जाएगी।
इसके अलावा चीन, जापान, सिंगापुर, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड से आने वालों के लिए आरटी पीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट यात्रा शुरू होने से पहले दिखाना अनिवार्य है। भारत आने के बाद इन यात्रियों को रैंडम जांच प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है।