मोनोक्नोल एंटीबॉडी दवा दो दवाओं का मिश्रण है। इसलिए इसे एंटीबॉडी कॉकटेल दवा भी कहा जाता है। इसे दो दवाओं कासिरिविमाब और इम्देवीमाब के 600-600 एमजी का डोज मिलाकर तैयार किया जाता है। ये दवा काफी महंगी होती है। हाल ही में गुजरात की दवा कंपनी जायडस कैडिला ने ZRC-3308 के नाम से एंटीबॉडी कॉकटेल दवा बनाई है और इसके ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी मांगी है।
किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बहुत जरूरी होती है। एंटीबॉडी प्रोटीन होते हैं, जो किसी भी बीमारी से शरीर को बचाते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए लैब में तैयार किया जाता है। कासिरिविमाब और इम्देवीमाब को स्विट्जरलैंड की फार्मा कंपनी रोशे ने बनाया है, जो कोविड के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 के खिलाफ प्रोटीन बनाती है। ये दवा शरीर में कोरोनावायरस को फैलने से रोकती है।
एंटीबॉडी दवा अमेरिका से आई है। फिलहाल इस दवा का इस्तेमाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल और दिल्ली के फोर्टिस एस्कोर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और अपोलो अस्पताल में किया जा रहा है। हाल ही में इस दवा से एक व्यक्ति भी ठीक हुआ है।