दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम भारत में चलता है, जिसमें नौनिहालों और माताओं की सुरक्षा के लिए टीके लगाए जाते हैं। भारत में सबसे ज्यादा टीके का उत्पादन भी होता है। लेकिन इस बार लॉकडाउन से 60 फीसदी तक टीकाकरण में गिरावट आई है।
सीरिंज-ग्लास वायर की कमी
कोरोना टीके को सुरक्षित रखने के लिए कांच के एक विशेष प्रकार के वायल की जरूरत है। साथ ही टीके को लगाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सीरिंज भी चाहिए। बिल गेट्स ने हाल ही में यह मुद्दा भी उठाया था और इसके इंतजाम पर 2,560 करोड़ रुपए विश्व स्तर पर खर्च करने की फैसला भी लिया था। भारत में सीरिंज का उत्पादन काफी होता है। करीब दिन हर साल बनती हैं और विदेशों में भेजी जाती हैं।
ऑर्डर दिया लाखों का, भुगतान अब तक नहीं
ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया डॉक्टर वीजी सोमाननी ने जून 2021 तक 140 करोड़ सिरिंज बनाने के निर्देश दिए हैं लेकिन एचएमडी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव नाथ का कहना है कि इस साल लाखों सीरिंज के आर्डर सरकार ने दिए थे। अब तक इसका भुगतान हुआ है। ऐसे मेंप्राइवेट कंपनियां सरकार के साथ मिलकर कैसे काम कर सकती हैं।
फ्रिज, ट्रक भी जरूरी
आमतौर पर भारत में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर टीके को रखा जाता है लेकिन कोरोना के टीके को शून्य से नीचे रखने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए करीब एक लाख से भी ज्यादा फ्रिज और रेफ्रिजरेटर युवकों की आवश्यकता पड़ेगी। डब्ल्यूएचओ के गगनदीप कांग का कहना है कि भारत में टीके को लेकर कोल्ड चैन पर काफी काम करने की जरूरत है।