फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Corona Vaccine: देश में पहली बार वयस्कों को टीका दिए जाने से पिछड़ सकता है मातृ-शिशु की सुरक्षा कार्यक्रम

Sat, 31 Oct 2020 07:16 AM IST
Kuldeep Singh परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम भारत में चलता है, जिसमें नौनिहालों और माताओं की सुरक्षा के लिए टीके लगाए जाते हैं। भारत में सबसे ज्यादा टीके का उत्पादन भी होता है। लेकिन इस बार लॉकडाउन से 60 फीसदी तक टीकाकरण में गिरावट आई है।

विज्ञापन


718 में से केवल 10 फीसदी जिलों में ही 90 फीसदी से ज्यादा है टीकाकरण
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 718 में से केवल 10 फीसदी जिला ही 90 फीसदी से अधिक लक्ष्य पूरा कर पा रहे हैं। ऐसे में कोरोना टीकाकरण ने सिर्फ सरकारों के लिए चुनौती है बल्कि इसकी वजह से माता-शिशुओं का टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित होने की चिंता होने लगी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने अगले वर्ष की शुरुआत में कोरोना का टीका मिलने और जुलाई तक 50 करोड़ डोज तैयार होने की उम्मीद जताई है। क्योंकि देश में पहली बार हुआ है कि व्यस्कों को बड़े स्तर पर टीका दिया जाएगा, ऐसे में अमर उजाला ने टीकाकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड चेन से लेकर वितरण पर पड़ताल की तो जमीनी स्तर पर कई बड़ी चुनौतियों का पता चला। 
विज्ञापन


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 27000 कोल्ड चेन हैं। यहां 76 हजार के आसपास फ्रीज इत्यादि की व्यवस्था है। 55 हजार स्वास्थ्य कर्मचारी टीकाकरण के लिए तैनात हैं। भारत के पास पोलियो टीकाकरण के रूप में एक बेहतर अनुभव है लेकिन सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूपीआई) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाएं और 2.6 करोड़ नौनिहालों को 39 करोड़ टीके की डोज दी जाती है। अब कोरोना वायरस के टीके की 50 करोड़ डोज देने के लिए सरकार को दोगुनाी रफ्तार से टीकाकरण कार्यक्रम चलाना होगा।  

15 साल में 18 प्रतिशत ही बढ़ा नौनिहाल-माताओं का टीकाकरण

इंद्रधनुष जैसे कार्यक्रम पर पड़ सकता है असर
दिल्ली एम्स के डॉक्टर सुरेश राय का कहना है कि भारत पहले ही मातृ-शिशु के टीकाकरण को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्थिति देख यही लगता है कि कोरोना का टीका आने के बाद मिशन इंद्रधनुष जैसे अन्य टीकाकरण कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। सरकार के पास जरूर एक बेहतर रणनीति होनी चाहिए।

कोरोना टीका 

  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 150 करोड़ डोज तैयार कर रहा है। इसका परीक्षण तीसरे चरण में है।
  • भारत बायोटेक कंपनी 50 करोड़ डोज तैयार कर रही है इसका दूसरे दौर का परीक्षण हाल ही में पूरा हुआ है।
  • बायोलॉजिकल पी कंपनी भी पचास कोडे तैयार कर रही है इसका परीक्षण अभी दूसरे चरण में है।
  • सीरम और भारत बायोटेक के टीके की 2-2 डोज़ लेनी होंगी।
  • जनवरी से अगस्त 2020 तक केवल 1.2 करोड़ बच्चों को टीका दिया गया। जबकि लक्ष्य 2.67 करोड़ का है।
  • यूपीआई वर्ष 2019 के अनुसार, वर्ष 2005-06 में 44 फ़ीसदी टीकाकरण हुआ था। जोकि वर्ष 2015 से 16 तक 18 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 62 फीसदी तक पहुंचा था।
  • आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति की 42 फीसदी महिलाएं व बच्चे टीकाकरण से दूर हैं।

सीरिंज-ग्लास वायर की कमी
कोरोना टीके को सुरक्षित रखने के लिए कांच के एक विशेष प्रकार के वायल की जरूरत है। साथ ही टीके को लगाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सीरिंज भी चाहिए। बिल गेट्स ने हाल ही में यह मुद्दा भी उठाया था और इसके इंतजाम पर 2,560 करोड़ रुपए विश्व स्तर पर खर्च करने की फैसला भी लिया था। भारत में सीरिंज का उत्पादन काफी होता है। करीब दिन हर साल बनती हैं और विदेशों में भेजी जाती हैं।

ऑर्डर दिया लाखों का, भुगतान अब तक नहीं
ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया डॉक्टर वीजी सोमाननी ने जून 2021 तक 140 करोड़ सिरिंज बनाने के निर्देश दिए हैं लेकिन एचएमडी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव नाथ का कहना है कि इस साल लाखों सीरिंज के आर्डर सरकार ने दिए थे। अब तक इसका भुगतान हुआ है। ऐसे  मेंप्राइवेट कंपनियां सरकार के साथ मिलकर कैसे काम कर सकती हैं।

फ्रिज, ट्रक भी जरूरी
आमतौर पर भारत में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर टीके को रखा जाता है लेकिन कोरोना के टीके को शून्य से नीचे रखने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए करीब एक लाख से भी ज्यादा फ्रिज और रेफ्रिजरेटर युवकों की आवश्यकता पड़ेगी। डब्ल्यूएचओ के गगनदीप कांग का कहना है कि भारत में टीके को लेकर कोल्ड चैन पर काफी काम करने की जरूरत है।

विज्ञापन

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें