देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है। ऐसे में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) ने बृहन्मुंबई नगरपालिका के सामने एक गणितिय मॉडल पेश किया है। इसके अनुसार, इस साल दिसंबर या अगले साल जनवरी तक शहर में रहने वाली आबादी का 75 प्रतिशत हिस्सा और स्लम इलाकों में 50 प्रतिशत हिस्से में इम्यून (रोग प्रतिरोधक क्षमता) हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद कोरोना वायरस संक्रमण दूसरे लोगों में नहीं फैलेगा। हालांकि मॉडल में कोरोना के पुन: संक्रमण के बारे में कोई बात नहीं की गई जो पिछले कुछ समय से पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। टीआईएफआर की टीम का कहना है कि सितंबर में शहर के कार्यालयों और परिवहन प्रणालियों की क्षमता को 30 प्रतिशत खोल देना चाहिए। इसे अक्तूबर में 50 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए।
डॉक्टर जुनेजा ने कहा, ‘आगे शहर को धीरे-धीरे खोलना चाहिए और एक नवंबर तक पूरी तरह से चालू कर देना चाहिए।’ हालांकि, सार्वजनिक परिवहन में सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए और ट्रेनों और कार्यस्थलों में आवश्यक तौर पर मास्क, हाथों की स्वच्छता और उनकी सतहों का नियमित कीटाणुशोधन (डिसइंफेक्शन) जैसे स्वच्छता उपायों का पालन किया जाना चाहिए।
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देश की गिरती अर्थव्यवस्था को देखते हुए मुंबई के साथ-साथ देश को पूरी तरह से खोलने की मांग की जा रही है। इसी वजह से टीआईएफआर की टीम ने विभिन्न परिदृश्यों का अध्ययन किया और पाया कि एक नवंबर तक अस्पताल में भर्ती होने वालों और मृतकों की संख्या कम हो जाएगी। वहीं सितंबर मध्य में मुंबई खोलने से मुंबई में अस्पताल में भर्ती होने वालों और गंभीर मामलों की दूसरी लहर आ सकती है। जो शहर को मई-जून के समय में ले जाएगी।
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से रविवार सुबह अद्यतन किए गए आंकड़े के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 1,065 लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 70,626 हो गई है। देश में संक्रमण के मामले बढ़कर 41,13,812 हो गए हैं, जिनमें से 8,62,320 लोगों का उपचार चल रहा है और 31,80,866 लोग उपचार के बाद इस बीमारी से उबर चुके हैं। कोरोना संक्रमण के कुल मामलों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।