राहुल गांधी ने डॉक्टर आशीष झा से लॉकडाउन पर उनके विचार पूछे और यह भी पूछा कि क्या इससे इससे मनोविज्ञान पर फर्क पड़ता है, ये लोगों के लिए कितना मुश्किल है? इसके जवाब में आशीष झा ने कहा-
लॉकडाउन से आप वायरस को धीमा कर सकते हैं। सिर्फ पीड़ित को समाज से अलग कर सकते हैं, उसके लिए टेस्टिंग जरूरी है। यह आपकी क्षमता को बढ़ाने का वक्त देता है। अगर लॉकडाउन का इस्तेमाल क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं किया गया तो इससे काफी नुकसान हो सकता है।
राहुल गांधी ने डॉक्टर झा से मजदूरों को लेकर भी बात की, उन्होंने सवाल किया कि वायरस की वजह से मजदूरों को पता नहीं कब दोबारा काम मिलेगा? जवाब में झा कहते हैं
कोरोना वायरस एक-दो महीने में नहीं जाएगा, ये 2021 तक रहने वाला है। कितना नुकसान होने वाला है ये किसी को पता नहीं, लेकिन रोज कमाने-रोज खाने वाले मजदूरों तक मदद पहुंचने की जरूरत है।
फिर राहुल ने टेस्टिंग को लेकर सवाल किया, पूछा कि किस रणनीति पर काम करना चाहिए? जवाब में प्रोफेसर झा ने कहा-
दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों ने टेस्टिंग को लेकर अच्छा काम किया है। टेस्टिंग अधिक होनी ही चाहिए। तभी यह पता चल सकता है कि किस क्षेत्र में वायरस का ज्यादा प्रभाव है। सिर्फ इसी तरीके से आप संक्रमितों की पहचान कर पाएंगे। अस्पताल आने वाले हर शख्स की टेस्टिंग होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी कारण से वहां पहुंचा हो। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों की टेस्टिंग में भी आक्रामकता जरूरी है।
राहुल गांधी ने ये भी पूछा कि क्या गर्मी से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा, इस तरह के कई तर्क दिए गए, आप क्या कहेंगे? प्रोफेसर झा ने कहा-
गर्मी से ये रुक जाएगा, ऐसा तर्क देना पूरी तरह सही नहीं है। कोरोना को लेकर कई तरह के सबूत हैं कि मौसम फर्क डालता है, अगर लोग बाहर अधिक रहते हैं तो कोरोना अधिक फैलता है।
19 मिनट 55 सेकेंड के आसपास राहुल मुस्कुराते हुए पूछ बैठते हैं कि, भैया बताइए वैक्सीन कब आएगी? प्रोफेसर झा ने जवाब दिया-
अमेरिकन, चाइनीज और ऑक्सफोर्ड की एक वैक्सीन हैृ, तीनों कारगर लग रही है। पता नहीं कौन सी काम आएगी, हो सकता है तीनों काम आ जाए, लेकिन पूरी तरह से उम्मीद है कि अगले साल तक वैक्सीन आ पाएगी। भारत को इसके लिए प्लान बनाना पड़ेगा, क्योंकि भारत को 50 करोड़ से अधिक वैक्सीन बनानी है।