अभी तक नही आई है रिपोर्ट
बॉर्डर पर उपस्थित स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने अमर उजाला से कहा, आसपास के क्षेत्र में कोरोना टेस्ट सरकार द्वारा किये जा रहे हैं। फिलहाल यहां भी एक कैंप लगाया था, जिसकी रिपोर्ट अभी नही आई है। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए मोबाइल वैन यहां जल्द लगाएगी। बीमार लोगों को जांच कर दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही है।
दिल्ली सरकार की टीम भी है तैनात
बॉर्डर पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी तैनात कर रखा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अमर उजाला से कहा कि, 'सामान्य बीमारी के लिए हमने यहां डॉक्टरों की टीम ड्यूटी पर लगा रखी है। इमरजेंसी की स्थिति के लिए डॉक्टर और एम्बुलेंस भी हैं। हर दिन शिफ्ट के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लग रही है।
किसान नहीं कर रहे मास्क का उपयोग
प्रदर्शनकारी किसान मास्क का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वही सामाजिक दूरी के नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। सैकड़ों किसान बिना दूरी के साथ खाना खा रहे हैं और जत्थों में रह रहे हैं। चेहरे पर मास्क नहीं पहनने के सवाल पर किसानों का कहना है कि, यहां कोई कोरोना नहीं है। सभी ठीक हैं। पंजाब और हरियाणा के लोगों की इम्युनिटी पावर अच्छी होती है। इसलिए हमें कोई भी कोरोना से डर नहीं लगता है।
प्रदर्शन स्थल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम और एनजीओ द्वारा मुफ्त में किसानों को मास्क, साबुन, हैंड सेनेटाइजर वितरित किया जा रहा है। लेकिन किसान इसे लेने में कोई भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। एनजीओ और स्वास्थ्य विभाग की टीम का कहना है कि, फ्री में देने पर भी कोई हैंड सेनेटाइजर नहीं ले रहा है। मास्क भी लोग नहीं लेते है। इसलिए हमने वितरित करना ही छोड़ दिया है। हमारे कैम्प में सभी जरूरी दवाएं और एहतियाती सामान हैं जिसको लगता है वो खुद आकर ले लेता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल जारी है। दिल्ली बॉर्डर पर किसान आठ दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसान केंद्र सरकार के इन कानूनों को काला कानून बता रहे हैं। वहीं, सरकार भी किसानों को समझाने में जुटी हुई है।