बच्चों को लेकर जैगम इमाम ने कहा, अपने पत्रकारिता के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि मीडिया बच्चों के प्रति जवाबदेह नहीं है। बच्चे देश के इतने महत्वपूर्ण घटक हैं कि सत्यजीत रे जैसे फिल्मकार भी बच्चों को केंद्र में रखकर अपनी फिल्में बनाते हैं। पाथेर पांचाली और अपूर संसार जैसी महान फिल्में इसकी उदाहरण हैं। मीडिया में बच्चों के लिए यदि संवेदनशीलता नहीं है, तो इसका मतलब है कि बच्चों के प्रति वहां अनुराग नहीं है। इसलिए, इस अनुराग को पहले पैदा करना होगा। बच्चों के जरिए हम समाज के अनदेखे कोने को सामने ला सकते हैं। मीडिया को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, नहीं तो आने वाला कल का भारत गड़बड़ियों से भरा होगा।
परिचर्चा में शामिल हुए वक्ताओं ने कोरोना काल में मीडिया में बच्चों के प्रति उपेक्षाभाव पर चिंता व्यक्त की। साथ ही कहा कि मीडिया में इस अत्यंत जरूरी मुद्दे के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाए जाने की जरूरत है।
बता दें कि बच्चों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्ति की छठी वर्षगांठ के पांचवें दिन आयोजित यह कार्यक्रम ‘फ्रीडम वीक’ के तहत आयोजित किया गया। पिछले पांच दिनों से वर्चुअल परिचर्चाओं और फिल्म स्क्रीनिंग का यह सिलसिला अभी जारी है। इसके तहत अभी दो और विशेष परिचर्चाओं का आयोजन होना है, जिसमें कैलाश सत्यार्थी के काव्य संग्रह और पुस्तक 'सभ्यता का संकट और समाधान' का भी विमोचन होगा।