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भारत में कम है मृत्यु दर, आंध्र प्रदेश में ज्यादा तो गुजरात में हो रहे कम परीक्षण

Sat, 09 May 2020 02:00 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तापमान जांचते पुलिसकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जैसे क्या हम उपयुक्त संख्या में टेस्टिंग कर रहे हैं? क्या यह पर्याप्त है? क्या राज्य ठीक तरह से टेस्टिंग कर पा रहे हैं? क्या जो राज्य कम टेस्ट कर रहे हैं वहां संक्रमितों की मृत्यु दर ज्यादा है? हम आपके ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब लाए हैं।

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किसी भी देश के पास ऐसा सटीक डाटा मौजूद नहीं है जिससे परीक्षण और मृत्यु दर के बीच किसी तरह का संपर्क दिखता हो। हालांकि विश्लेषण दिखाते हैं कि जिन देशों ने ज्यादा परीक्षण किए हैं वे बहुत जल्द लॉकडाउन के नियमों में ढील दे पाए। जिसका मतलब है कि वे अधिक जागरूक हैं और इसलिए अपने देशों में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

भारत की बात की जाए तो यहां मृत्यु दर कम है। हालांकि कम टेस्ट की वजह से यहां दुनिया के कई हिस्सों के मुकाबले लंबे समय से लॉकडाउन जारी है। परीक्षण संख्या पर नजर डाली जाए तो भारत ने ज्यादा परीक्षण नहीं किए हैं। हमारे यहां बेशक परीक्षणों की संख्या अब बढ़ गई है लेकिन कई प्रभावित देशों की तुलना में यह अब भी कम है।
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आंध्र प्रदेश में ज्यादा तो गुजरात में हो रहे कम परीक्षण
आंध्र प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्य सबसे ज्यादा परीक्षण कर रहे हैं। अब तक यहां मृतकों की संख्या कम है। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्य, जहां मृतकों की संख्या ज्यादा है वहां परीक्षण दर कम या मध्यम है।

ज्यादा परीक्षण की वजह से दिल्ली में मिल रहे कम मरीज
डाटा से पता चलता है कि अधिक परीक्षण के जरिए वायरस के बारे में शुरुआत में ही पता लगाने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली ने शुरुआत में ही परीक्षण दर बढ़ा दी थी और यहां तेजी से मामले सामने आए। हालांकि बाद में मामलों की संख्या कम होती गई। वहीं पंजाब ने शुरुआत में कम परीक्षण किए। जहां अब संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

आईसीएमआर ने नकारी सामुदायिक प्रसार की बात
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अधिकारियों ने वायरस के सामुदायिक प्रसार की बात नकारी है। रैंडम सैंपलिंग के अभाव में देश में कोविड-19 के प्रसार की सही सीमा का पता नहीं चला है। जिसके कारण कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

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