कोरोना वायरस से बचाव के लिए जहां एक ओर कोरोना टीकाकरण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं वायरस के नए-नए वैरिएंट पर वैक्सीन का असर भी कम होने लगा है।
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अभी तक सरकार दावा कर रही थी कि कोरोना वायरस के विभिन्न वैरिएंट पर वैक्सीन असरदार है, लेकिन पहली बार वैज्ञानिकों ने अध्ययन में साबित किया है कि बीटा और डेल्टा वैरिएंट पर देश की पहली स्वदेशी कोवाक्सिन दो से तीन गुना कम असरदार है।
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया है। इसके लिए कोरोना से ठीक होने वाले, वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले लोगों का अलग-अलग समूह लिया गया। अध्ययन के दौरान 20 ऐसे मरीजों का चयन किया गया जो चार सप्ताह पहले ही कोरोना निगेटिव हुए थे ।
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बी.1 से संक्रमित लोगों में एंटीबॉडी 187% जबकि डेल्टा वालों में 68%
कुछ ऐसे लोगों का चयन किया गया जिन्होंने 28 दिन के अंतराल में कोवाक्सिन की दोनों खुराक लेकर टीकाकरण पूरा किया था। इन सभी लोगों के सैंपल लेकर जब एंटीबॉडी जांच की गई और फिर जीनोम सीक्वेसिंग कराई गई तो पता चला कि 20 में से 17 लोग बी.1 वैरिएंट से संक्रमित थे। जबकि, तीन मरीज कापा वैरिएंट से संक्रमित थे।
इसीलिए वैज्ञानिकों ने अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए जब बी.1, बीटा और डेल्टा वैरिएंट पर वैक्सीन के असर का पता लगाया तो जांच के दौरान बी.1 वैरिएंट से संक्रमित रह चुके व्यक्तियों में एंटीबॉडी का स्तर 187.5 फीसदी मिला । जबकि बीटा वैरिएंट का 61.57 और डेल्टा वैरिएंट का असर 68.97 फीसदी पाया गया।