केरल के सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ छह फरवरी को सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर इस संबंध में नोटिस अपलोड कर दी गई है।
इस फैसले पर पुनर्विचार के लिये करीब 48 याचिकायें दायर की गयी हैं। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद केरल में इसके पक्ष और विरोध में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए हैं।
नोटिस के अनुसार प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
शीर्ष अदालत के पिछले साल 28 सितंबर के फैसले में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। पीठ ने कहा था कि महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लैंगिक पक्षपात के समान है।
शीर्ष अदालत 13 नवंबर, 2018 को इस फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं पर जनवरी महीने में सुनवाई के लिये तैयार हो गई थी। हालांकि, 22 जनवरी को शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई शायद शुरू नहीं हो सके क्योंकि न्यायमूर्ति मल्होत्रा मेडिकल अवकाश पर हैं। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति मल्होत्रा ने अल्पमत का निर्णय सुनाया था।