आय से अधिक संपत्ति मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर अब 3 अप्रैल को सुनवाई होगी। पटियाला हाउस कोर्ट अभी इस आरोपपत्र की समीक्षा कर रही है। शनिवार को विशेष सीबीआई जज विरेंद्र कुमार गोयल ने आरोपपत्र पर सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया है कि आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जाएगा। उसके बाद ही आगे समन समेत अन्य कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
दायर आरोपपत्र को लेकर शनिवार को अदालत ने कहा कि आरोपपत्र के दस्तावेज की जांच की जा रही है। सीबीआई ने आरोपपत्र के समर्थन में क्या दस्तावेज दिए हैं सभी की जांच की जा रही है। सीबीआई ने करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें 255 गवाह के नाम शामिल हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अलावा इसमें उनके दूसरे सहयोगियों के भी नाम हैं।
दायर आरोपपत्र में मुख्यमंत्री की पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईजी एजेंट आनंद चौहान उनके सहयोगी चुन्नी लाल, जोगिंदर सिंह घालटा, प्रेम राज, लवण कुमार कोच समेत कुल 9 लोग शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि समीक्षा के दौरान जरूरत पड़ी तो सीबीआई से दूसरे दस्तावेज भी मांगे जाएंगे। बताते चलें कि बीते 31 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सीबीआई के एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।
क्या है मामला
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सितंबर 2015 में मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह, उनकी पत्नी व अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13 (2) और 13 (1) और आईपीसी की धारा 109 के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि 28 मई 2009 से 26 जून 2012 तक इस्पात मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री ने 10 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। वर्ष 2007 व 2008 के दौरान उनके व एलआईसी एजेंट आनंद चौहान के बैंक खातों में बड़ी रकम की लेनदेन हुई।