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Gujarat: अदालत से दिल्ली एलजी सक्सेना को झटका, मारपीट के एक मामले में याचिका खारिज, कोर्ट ने कही यह बात

Sat, 13 May 2023 05:11 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, अहमदाबाद।

सार

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीएन गोस्वामी की अदालत ने आठ मई को वीके सक्सेना को नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर कथित तौर पर हमला करने के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया। 
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वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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अहमदाबाद की एक अदालत से दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को झटका लगा है। अदालत ने सक्सेना की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनके खिलाफ मारपीट के एक मामले में उनके पद पर रहने तक मुकदमे को स्थगित रखने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसा करके गुजरात की अदालतों में लंबित मामलों को बढ़ाना नहीं चाहते हैं।

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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीएन गोस्वामी की अदालत ने आठ मई को वीके सक्सेना को नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर कथित तौर पर हमला करने के मामले में राहत देने से इनकार कर दिया। आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई।

यह मामला उस समय का है जब मेधा पाटकर अप्रैल 2002 में गुजरात दंगों के खिलाफ गांधी आश्रम में शांति बैठक कर रही थीं, तब एक समूह ने उनपर हमला किया था जिसमें सक्सेना भी शामिल थे। पाटकर ने शहर के साबरमती पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
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अदालत ने कहा कि यह मामला 2005 से चल रहा है यानी 18 साल हो गए और यदि आरोपी के खिलाफ मुकदमा निलंबित कर दिया जाता है, तो इसमें और समय लगेगा साथ ही स्वाभाविक रूप से यह मामला कई वर्षों तक लंबित रहेगा। इससे केवल गुजरात न्यायपालिका में लंबित पुराने मामलों की संख्या बढ़ेगी।

अदालत ने कहा कि सक्सेना के खिलाफ मुकदमा पिछले कई साल से चल रहा है और इस अवधि के दौरान उन्होंने राज्य सरकार से इसे स्थगित करने का अनुरोध नहीं किया और न ही राज्य ने ऐसा कोई अनुरोध किया। अदालत ने कहा कि आरोपी को पहले ही निचली अदालत में पेशी से छूट दी जा चुकी है।

कोर्ट ने कहा कि "अगर आरोपी नंबर चार (सक्सेना) के खिलाफ कार्यवाही रोक दी जाती है, तो मामला कई और वर्षों तक लंबित रहेगा। गुजरात की अदालतों में लंबित पुराने मामलों की स्थिति को देखते हुए यह केवल लंबित मामलों को बढ़ाएगा।"

सक्सेना ने संविधान के तहत दी गई प्रतिरक्षा का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) के पद पर रहने तक उनके खिलाफ मुकदमे पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि जब आरोप लगाया गया था, उस वक्त सक्सेना संवैधानिक पद पर नहीं थे।

अदालत ने कहा कि यदि तीन अन्य अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा जारी रहता है और उनके (सक्सेना के) खिलाफ रोक लगा दिया जाता है, तो मामले में पहले से ही पेश किए गए सभी गवाहों से उनके खिलाफ मुकदमा शुरू होने पर फिर से पूछताछ करनी होगी और इससे उन्हें कठिनाई होगी।


अदालत ने यह भी कहा कि सक्सेना और तीन अन्य के खिलाफ मुकदमा पिछले 18 साल से लंबित है। इसने कहा कि 71 और गवाहों की जांच की जानी है और इस अगर मुकदमे पर रोक लगाई जाती है तो इसमें काफी समय लगेगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि सक्सेना कानूनी स्थिति से वाकिफ हैं कि मुकदमे को रोका नहीं जा सकता। अगर यह संभव होता तो सक्सेना के एलजी बनने के बाद इसे जारी नहीं रखा जाता। अदालत ने आगे कहा कि सक्सेना इस तथ्य से अवगत हैं कि घटना के समय वह एलजी के पद पर नहीं थे।

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