राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा की जा रही इस मामले की जांच में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश डीई कोठालिकर ने 12 जुलाई को तेलतुंबडे की जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की थी, हालांकि विस्तृत आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई। तेलतुंबडे अभी नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं।
मुंबई में एक विशेष अदालत ने कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं। अदालत ने यह भी कहा कि वह तेलतुंबडे के खिलाफ आरोपों को 'स्वाभाविक रूप से असंभव' या 'पूरी तरह अविश्वसनीय' नहीं पाती है। विशेष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया वह एक प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में शामिल था।
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अदालत ने कहा, 'दस्तावेजों, ई-मेल के आदान-प्रदान और अभियोजन ने जिन गवाहों पर भरोसा किया उनके बयानों का अध्ययन व आवेदक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता के प्रति-परीक्षण के बाद इस अदालत ने पाया कि आरोप स्वाभाविक रूप से असंभाव्य या पूरी तरह से अविश्वसनीय नहीं हैं।' एनआईए ने पिछले साल अप्रैल में तेलतुंबडे को गिरफ्तार किया था और उन्होंने जनवरी 2021 में जमानत याचिका दायर की थी।
याचिका में दावा किया गया है कि अभियोजन पक्ष का यह आरोप सही नहीं है कि वह युद्ध छेड़ रहे हैं या युद्ध छेड़ने का प्रयास कर रहे हैं या जनता को उकसा रहे हैं। न्यायाधीश ने कहा, टइसके विपरीत, मुझे इस नतीजे पर पहुंचने में कोई हिचक नहीं है कि इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर अदालत प्रथम दृष्टया इस नतीजे पर पहुंच सकती है कि आवेदक (तेलतुंबडे) के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं।