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Karnataka: कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- शिकायत के बाद आरोपी वेश्यालय का ग्राहक होने का दावा नहीं कर सकता

Sat, 05 Nov 2022 05:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

आरोपी मोहम्मद शरीफ उर्फ फहीम हाजी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ता केवल एक ग्राहक था जिसे आरोपी नंबर 1 द्वारा पेश किया गया था। और एक ग्राहक होने के नाते उसने  शिकायतकर्ता के साथ कथित यौन संबंध बनाए थे। उन्होंने कहा कि वह महज एक ग्राहक था। 
 
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कोर्ट का फैसला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कार्यवाही करते हुए पड़ोसी केरल के कासरगोड के एक 44 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया। मामले को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि अगर वेश्यालय में नाबालिग लड़की शिकायत करती है कि किसी व्यक्ति ने उससे जबरदस्ती यौन संबंध बनाए हैं। ऐसे में आरोपी वेश्यालय का ग्राहक होने का दावा नहीं कर सकता और उसे छोड़ा नहीं जा सकता है। 

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न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ ने 45 वर्षीय मोहम्मद शरीफ उर्फ फहीम हाजी की याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश दिया।  अपनी याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। आरोपी ने दावा किया था कि वह एक वेश्यालय का ग्राहक है और उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि कई मौकों पर वेश्यालयों पर छापेमारी में गिरफ्तार और आईटीपी के तहत आरोपित ग्राहकों को छोड़ दिया है।

आरोपी मोहम्मद शरीफ उर्फ फहीम हाजी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ता केवल एक ग्राहक था जिसे आरोपी नंबर 1 द्वारा पेश किया गया था। और एक ग्राहक होने के नाते उसने  शिकायतकर्ता के साथ कथित यौन संबंध बनाए थे। उन्होंने कहा कि वह महज एक ग्राहक था। 
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आरोपी के वकील की दलील सुनने के बाद, अदालत ने कहा कि उनका यह कहना कि वह एक ग्राहक हैं और  उन्हें दोषमुक्त किया जाना चाहिए और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत उनपर मुकदमा चलाने के लिए उत्तरदायी नहीं होना चाहिए।  यह फिर से अस्वीकार्य है क्योंकि यह ऐसा मामला नहीं है जहां कथित पीड़िता 18 साल से ऊपर थी। साथ ही ऐसा भी नहीं है कि पुलिस ने तलाशी ली हो और किसी खास जगह पर किसी घटना का पता चला हो, जिसका इस्तेमाल वेश्यावृत्ति का रैकेट चलाने के लिए किया गया हो। ऐसे में याचिकाकर्ता की अपील को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। 
 
गौरतलब है कि मेंगलुरु में पढ़ने वाली चिकमगलुरु की एक 17 वर्षीय लड़की ने इस मामले में आरोपी सहित कुछ लोगों के खिलाफ वेश्यावृत्ति और कई लोगों द्वारा यौन उत्पीड़न के लिए मजबूर करने की शिकायत दर्ज कराई थी। वह घर में बंद लोगों के चंगुल से छूटकर फरार हो गई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि  वह  अपने रिश्तेदार के साथ रहकर पढ़ाई कर रही थी. मदद की आड़ में उससे संपर्क करने वाले आरोपी ने उसे वेश्यालय में धकेल दिया। उन्होंने ग्राहकों के साथ लड़की का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था और उसे देह व्यापार में जारी रखने के लिए मजबूर किया था।

आरोपी ने लड़की को धमकी दी थी कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो वे उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देंगे। जांच के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने नाबालिग लड़की के साथ सेक्स किया, एक्ट रिकॉर्ड किया और उसे धमकाया। 

इस मामले में पुलिस ने कई मामले दर्ज किए हैं। उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले आरोपी ने भी मामले को खारिज करने की मांग की क्योंकि एक ही घटना में कई मामले दर्ज किए गए हैं।
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