दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर दो बच्चे पैदा करने कके मानदंडों को अमल में लाने के लिए आदेश जारी करने की मांग की वाली याचिका को खाजिर कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत सरकार के कार्यों को अंजाम नहीं दे सकती।
न्यायमूर्ति डीएन पटेल और सी हरी शंकर की पीठ ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई करने करने का कोई वजह नहीं है, इसलिए इस याचिका को खारिज किया जाता है। पीठ ने कहा कि न्यायपालिका सरकार के कार्यों को नहीं कर सकती है और अदालत संसद और राज्य विधानसभाओं को निर्देश जारी नहीं करना चाहती है।
देश में एक परिवार में अधिकतम दो बच्चे पैदा करने के लिए बनाए कानून के अमल पर फैसला करने का कार्यक्षेत्र संसद का है। इसलिए पीठ इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि अदालत का काम कानून की व्याख्या करना है।
अदालत की भूमिका कानून के लागू होने के बाद शुरू होती है। अगर ऐसी याचिका की अनुमति दी जाती है, तो अदालत को सरकार के विभिन्न विभागों के लिए काम करना होगा। यह याचिका भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपध्याय द्वारा दायर की गई।
याचिका में युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, सहायता और सब्सिडी संरक्षित करने का हवाला देते हुए अधिक से अधिक दो बच्चे पैदा करने की बाध्यता संबंधी कानून के क्रियान्वयन के लिए आदेश जारी करने की मांग की गई थी।