उत्तराखंड में आराम से सत्ता हासिल करने की राह बढ़ती दिख रही भाजपा और मोदी सरकार सियासी चक्रव्यूह में उलझ कर रह गई है। एक तरफ जहां नैनीताल हाईकोर्ट के प्रतिकूल रुख से पार्टी परेशान है, वहीं दूसरी ओर उसे अब सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में राष्ट्रपति शासन पर सहमति की मुहर लगवाने की चिंता खाए जा रही है।
पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि कांग्रेस के खिलाफ बगावत की राह पकड़ने वाले 9 विधायकों की सदस्यता का मामला भी अदालत के विचाराधीन है, जबकि पूरे मामले में राज्यपाल भी अदालत में एक पक्ष हैं।
इस बीच बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने राज्य के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सांसद सतपाल महाराज और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी के साथ अलग-अगल चर्चा की। विजयवर्गीय ने जल्द कुछ न कुछ होने की बात कही और यह भी कहा कि मौका मिला तो भाजपा राज्य में सरकार बनाने की कोशिश करेगी।