उन्होंने बताया कि प्रियदर्शिनी की मां की याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया था। छात्रा ने 16 मई 2012 की रात को छात्रावास के अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को पता चला कि प्रियदर्शिनी प्रदीप से प्यार करती थी, जिसने प्रदीप से दूरी बनाना शुरू कर दिया था, जिससे उनके बीच मतभेद पैदा हो गए थे।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, 'यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने पीड़िता को एक एसएमएस भेजा था, जिसमें उसके चरित्र पर आक्षेप लगाया गया था, जो उसे अंदर से तोड़ने वाला बिंदु साबित हुआ और उसने 16 मई, 2012 की देर शाम या रात को अपने छात्रावास के कमरे में छत के पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।'
उन्होंने कहा कि चेन्नई के फोरेंसिक विज्ञान विभाग (एफएसडी) ने प्रियदर्शिनी के मोबाइल फोन से एसएमएस बरामद किया था, जिसके बाद सीबीआई ने प्रदीप के खिलाफ 24 नवंबर, 2017 को आरोप-पत्र दायर किया था। छह साल की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने प्रदीप को दोषी करार दिया है।
सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप वाले मामलों में दोषसिद्धि प्राप्त करना मुश्किल है क्योंकि एक अकाट्य और मजबूत संबंध होना चाहिए कि एक विशेष कार्रवाई ने पीड़ित को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया। जैसा कि एक पत्र या लिखित शब्द जिसमें पीड़ित को अपनी जान लेने के लिए कहा गया हो। मैं कहूंगा कि यह उन कुछ मामलों में से एक है जहां अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया है।