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Mumbai: शराबी निकला पुलिसकर्मी; कोर्ट ने कहा- छिपाया गया सच पलटा पूरा केस, तीनों आरोपी बरी

Thu, 18 Jun 2026 12:32 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई

सार

ठाणे की एक अदालत ने 2018 में पुलिस कांस्टेबल पर हमला और धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार तीन लोगों को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि मामले की जांच में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था और शिकायतकर्ता कांस्टेबल स्वयं शराब के नशे में था।  
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अदालत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ठाणे की एक अदालत ने 2018 में एक पुलिस कांस्टेबल पर हमला और धमकी देने के आरोपी मुजाराम उर्फ रामभाऊ बापूराव येनकुरे (40), सुनील गणपत रोकड़े (40) और बालू बापूराव येनकुरे (36)  तीन लोगों को बरी कर दिया है। बुधवार को दिए फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी संदेहास्पद है और जांच अधिकारी ने इस तथ्य को छिपाया घटना के दौरान शिकायतकर्ता पुलिसकर्मी स्वयं भी शराब के नशे में था।

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अदालत की टिप्पणी से बदला पूरा मामला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. टी. पवार ने बुधवार को दिए अपने आदेश में कहा कि आरोपियों का यह बचाव कि उनके साथ कांस्टेबल और अन्य लोगों ने मारपीट की थी, प्रथम दृष्टया संभावित प्रतीत होता है।

होली के दिन हुई थी घटना
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले के शिकायतकर्ता कांस्टेबल नवनाथ सदाशिव थोरवे ने 2 मार्च 2018 को होली के दौरान महाराष्ट्र के ठाणे शहर के येऊर गेट पर एक मोटरसाइकिल को रोका था। जांच के दौरान मोटरसाइकिल सवारों के शराब के नशे में होने का दावा किया गया था। अभियोजन के मुताबिक, वाहन जब्त किए जाने के बाद आरोपियों ने कांस्टेबल के साथ गाली-गलौज की और उन्हें थप्पड़ मारा।
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मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पोल
हालांकि, मामले में मेडिकल साक्ष्य निर्णायक साबित हुए। अदालत ने कहा कि मेडिकल अधिकारी ने गवाही में बताया कि परीक्षण के समय शिकायतकर्ता कांस्टेबल स्वयं अत्यधिक नशे में था।

जांच अधिकारी पर तथ्य छिपाने का आरोप
इस पूरे मामले पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा, 'साक्ष्यों को देखने से ऐसा लगता है कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर अधूरी मेडिको-लीगल रिपोर्ट एकत्र की और इस तथ्य को छिपाया कि परीक्षण के समय शिकायतकर्ता शराब के नशे  में था।' अदालत ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कांस्टेबल पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दे पा रहा था, असंगत बातें कर रहा था और उसका दिमान सही स्थिति में नहीं था।

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'ब्रीथ एनालाइजर रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी पुलिस'
अदालत ने आगे कहा कि अभियोजन की पूरी कहानी संदेहास्पद लगती है और आरोपियों का यह दावा कि उनके साथ कांस्टेबल और अन्य गवाहों ने मारपीट की थी, अधिक संभावित प्रतीत होता है। अदालत ने अपने फैसले में इस बात का भी जिक्र किया  कि पुलिस ब्रीथ एनालाइजर रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी, आरोपियों को लगी चोटों का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाहियों में भी विरोधाभास था। इन परिस्थितियों में आरोप पूरी तरह अविश्वसनीय प्रतीत हुए। अदात के इस फैसले से आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।  

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