पति-पत्नी के रिश्ते में खटास आ जाती है और तमाम कोशिशों के बावजूद उनके संबंध नहीं सुधारे तो आमतौर पर पति-पत्नी एक दूसरे के खिलाफ तलाक मुकदमा दायर करते हैं। लेकिन एक अनूठा मामला सुप्रीम कोर्ट में आया है जिसमें पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर अलग अलग मामलों में 67 मुकदमे दायर कर रखे हैं। मुकदमों की संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को भी घोर अचरज हुआ है।
भारतीय मूल के इस अमेरिकी नागरिक ने भारत में पत्नी केखिलाफ 58 मामले दर्ज कराए हैं जबकि पत्नी ने पति पर नौ मुकदमे दर्ज कराए हैं। ये मुकदमे दहेज उत्पीड़न, घरेलु हिंसा, अवमानना, बच्चों की कस्टडी आदि को लेकर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के पास यह मामला इस दंपती केआठ वर्ष केबच्चे की कस्टडी को लेकर पहुंचा है। न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ स्तब्ध रह गई जब उसे पता चला कि पति-पत्नी ने एक दूसरे के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज करा रखे हैं।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ ने कहा, ‘मैंने अपने पूरे लीगल कॅरियर में पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे पर इतनी बड़ी संख्या में मुकदमा दर्ज करने की बात कभी नहीं सुनी।’ न्यायमूर्ति जोसफ ने एक दंपती के मामले को याद करते हुए कहा कि जिसमें पति-पत्नी ने एक दूसरे पर 36 मुकदमे किए थे।
दोनों पक्षों के वकीलों ने पीठ को बताया कि दंपती वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और अब वह इसका समाधान चाहते हैं। जिस पर पीठ ने पति-पत्नी और उसकेआठ वर्ष केबच्चे को 27 अप्रैल को अदालत में पेश होने के लिए कहा है।
साथ ही पीठ ने यह निर्देश दिया है कि अंतरिम आदेश के जरिए पिता को अपने बेटे से हर शनिवार और रविवार आठ बजे सुबह से शाम सात बजे तक मिलने की छूट जारी रहेगी।
दंपती की शादी मई, 2002 में बंगलुरू में हुई थी। इसके बाद दोनों अमेरिका चले गए। वर्ष 2009 में उन्हें बेटा हुआ।
इसके बाद से पति-पत्नी केरिश्ते में खटास शुरू हो गया और धीरे-धीरे स्थिति बद से बदतर होती चली गई। जिसकेबाद पत्नी अपने बेटे के साथ वापस मायके आ गई थी। इसकेबाद एक-दूसरे के बाद मुकदमे ठोकने का दौर शुरू हो गया।