21वीं सदी के अंत तक देश का तापमान औसतन 4.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। साथ ही गर्म हवा के थपेड़े (लू) भी तीन से चार गुना तक बढ़ जाएंगे। यह झुलसाने वाली तस्वीर सरकार की एक रिपोर्ट से सामने आई है। सरकार ने पर्यावरण में हो रहे बदलाव और देश में इसके असर पर यह रिपोर्ट तैयार की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन मंगलवार को यह रिपोर्ट जारी कर सकते हैं।
देश में मानसून की वर्षा (जून से सितंबर) में 1951 से 2015 तक लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारत-गंगा के मैदानों और पश्चिमी घाटों पर उल्लेखनीय कमी आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंद महासागर के समुद्री सतह तापमान (एसएसटी) में 1951 से 2015 के दौरान औसतन एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जोकि वैश्विक औसत एसएसटी वार्मिंग से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। समुद्री सतह के तापमान का हिंद महासागर पर प्रभाव पड़ता है।
उत्तर हिंद महासागर में समुद्र स्तर 1874-2004 के दौरान प्रति वर्ष 1.06-1.75 मिलीमीटर की दर से बढ़ गया है और पिछले ढाई दशकों (1993-2017) में 3.3 मिलीमीटर प्रति वर्ष तक बढ़ गया है, जो वैश्विक माध्य समुद्र तल वृद्धि की वर्तमान दर के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 21वीं सदी के अंत में एनआईओ में समुद्र का स्तर 1986-2005 के औसत के लगभग 300 मिलीमीटर तक बढ़ सकता है।