देश के सांसदों को जल्दी ही हार्ट अटैक से बचने के तरीके सिखाए जा सकते हैं। इससे सांसद हार्ट अटैक की स्थिति में न सिर्फ अपनी सुरक्षा कर सकेंगे, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी मददगार साबित हो सकेंगे। इसके लिए जल्दी ही एक कार्यशाला का आयोजन किया जा सकता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम प्रकाश बिड़ला ने इस पर अपनी सहमति दे दी है।
जनांदोलन बनाने की जरूरत
बुधवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कोई भी देश विकास कर सकता है, सुंदर और खुशहाल हो सकता है, लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब उसके नागरिक निरोगी और स्वस्थ हों। उन्होंने कहा कि हाल में देखने में आया है कि लोग स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरुक हुए हैं। यह अच्छा संकेत है, लेकिन अभी भी इसे एक जनांदोलन बनाने की जरुरत है। पहले हम केवल रोगों के उपचार के प्रति ध्यान दिया करते थे, लेकिन अब बीमारी के पूर्व ही उनके प्रति लोगों को जागरुक करने का काम कर रहे हैं।
दो गुनी हो गईं हार्ट अटैक से होने वाली मौतें
दरअसल, हार्ट अटैक का हमला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। स्वास्थ्य की विश्व प्रसिद्ध पत्रिका लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक ने भारत में वर्ष 1990 के मुकाबले वर्ष 2016 में दोगुने लोगों को अपना शिकार बनाया। पत्रिका के मुताबिक वर्ष 1990 में गैर-संचारी रोगों के कारण होने वाली मौतों में हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या लगभग 15 फीसदी थी जो वर्ष 2016 में बढ़कर लगभग 28 फीसदी हो गई।
हृदय पर तेज पंपिंग बचा सकती है जान
विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक का खतरा बड़ा है, लेकिन कुछ सामान्य तरीके अपनाने से हार्ट अटैक से पीड़ित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। इसमें सबसे सामान्य नियम यह है कि जैसे ही किसी व्यक्ति के हार्ट अटैक से पीड़ित होने की जानकारी हो उसके हृदय पर तेजी से पूरी ताकत के साथ पंपिंग करनी चाहिए। ऐसा करने के साथ-साथ तत्काल नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने की कोशिश की जानी चाहिए।