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इन देशों में भी है हाइवे पर फाइटर जेट उतारने की सुविधा, जानिए क्यों है इसकी जरूरत

amarujala.com, Presented by: विष्णु रावल Updated Tue, 24 Oct 2017 12:27 PM IST
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फाइल फोटो
इंडियन एयरफोर्स ने आज (24 अक्टूबर) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 20 फाइटर जेट उतारे। इससे पहले मई 2016 में यमुना एक्सप्रेस वे पर एयरफोर्स के मिराज 2000 फाइटर प्लेन ने टच डाउन किया था। अब भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो युद्ध या किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने देश के हाइवे को फाइटर जेट का रनवे बना सकते हैं। भारत आने वाले वक्त में देश के और हाइवेज को भी इस लायक बनाने की कोशिश में है, फिलहाल आज का कार्यक्रम एयरफोर्स और राज्य सरकार ने मिलकर करवाया था।

एक्सप्रेसवे पर IAF का शक्ति प्रदर्शन, सुपर हरक्यूलिस लैंड, मिराज ने किया टचडाउन

आज की ड्रिल में C-130 सुपर हरक्यूलिस, मिराज 2000, AN-32 और सुखोई MKi शामिल थे। दुनिया में सबसे पहले यह कारनामा नाजी जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त किया था। उसके बाद बाकी देशों ने इसे आजमाया।
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फाइल फोटो
इंडियन एयरफोर्स ने आज (24 अक्टूबर) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 20 फाइटर जेट उतारे। इससे पहले मई 2016 में यमुना एक्सप्रेस वे पर एयरफोर्स के मिराज 2000 फाइटर प्लेन ने टच डाउन किया था। अब भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो युद्ध या किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने देश के हाइवे को फाइटर जेट का रनवे बना सकते हैं। भारत आने वाले वक्त में देश के और हाइवेज को भी इस लायक बनाने की कोशिश में है, फिलहाल आज का कार्यक्रम एयरफोर्स और राज्य सरकार ने मिलकर करवाया था।

एक्सप्रेसवे पर IAF का शक्ति प्रदर्शन, सुपर हरक्यूलिस लैंड, मिराज ने किया टचडाउन

आज की ड्रिल में C-130 सुपर हरक्यूलिस, मिराज 2000, AN-32 और सुखोई MKi शामिल थे। दुनिया में सबसे पहले यह कारनामा नाजी जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त किया था। उसके बाद बाकी देशों ने इसे आजमाया।

पाकिस्तान ने 2010 में लैंड करवाया था मिराज

एक्सप्रेस-वे पर उतरता विमान - फोटो : अमर उजाला
जिन देशों के हाइवे को रनवे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है उसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, फिनलैंड, जर्मनी, जापान, नोर्थ कोरिया, पाकिस्तान, पॉलैंड, सिंगापुर, साउथ कोरिया, श्रीलंका, स्वीडन, स्विटजरलैंड और ताइवान का नाम भी शामिल है। 

पाकिस्तान ने दो बार अपने हाइवे का इस्तेमाल फाइटर जेट को उतारने के लिए किया। पहली बार यह काम साल 2000 में F-7P के साथ किया गया और फिर 2010 में मिराज III को उतारा गया था। वहीं चीन ने यह ड्रिल सबसे पहले 1989 में की थी और उसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों मे इसे किया गया था।

इसकी जरूरत क्या है?

फाइटर जेट - फोटो : ANI
इससे किसी एक्सप्रेसवे को फाइटर जेट को उतारने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, युद्ध के वक्त दुश्मन किसी देश के एयरबेस को सबसे पहले नष्ट करते हैं, ऐसी स्थिति में अगर एक्सप्रेस-वे अच्छे होंगे तो उनपर फाइटर जेट को उतारकर उसे एयरबेस की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। 

ऐसे हाइवे कम से कम दो से 3.5 किलोमीटर लंबे होते हैं, इनको बाकी सड़कों से मोटा और मजबूत भी होना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में किसी एक्सप्रेसवे को रनवे बनाने में 24 से 48 घंटे का वक्त लगता है। किसी जेट को उतारने से पहले उस हाइवे के सारे गड्ढों को भरना होता है ताकि कोई हादसा ना हो जाए।
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