प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग का असर अब तेज होता जा रहा है। इसकी वजह से इस बार जाड़े के दिन कम होंगे। मौसम विभाग के अनुसार आने वाली गर्मी भी पिछली कुछ गर्मियों से ज्यादा गर्म रहने का अनुमान है।
पिछले दिनों कर्नाटक में हुए मौसम विज्ञानियों के सेमिनार में आगामी मौसम को लेकर जो रिपोर्ट तैयार की गई है उसमें जलवायु में तेजी से परिवर्तन आने की बात कही गई है। इसकी मुख्य वजह बढ़ते प्रदूषण को बताया गया है।
मौसम विज्ञानियों की रिपोर्ट के अनुसार जमीन से करीब तीन किलोमीटर ऊपर प्रदूषण की एक परत लगातार घनी होती जा रही है। ज्यादातर ठंड के मौसम में ऐसी स्थिति पैदा होती है। हवा में नमी होने की वजह से प्रदूषित कण एक जगह जमा होकर परत बना लेते हैं। इसकी वजह से जमीन से उठने वाली गर्मी उस परत से टकरा कर लौटती रहती है और वातावरण में फैलकर तापमान बढ़ाती है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या दुनियाभर के देश ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए कोशिशें कर रहे हैं?'
पोल के जवाब में हमें कुल 2407 वोट मिले। इनमें 36.31 फीसदी (874 वोट) पाठकों ने माना कि हां दुनियाभर के देश ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए कोशिशें कर रहे हैं, जबकि 63.69 फीसदी (1533 वोट) पाठकों ने माना कि दुनियाभर के देश ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए कोशिशें नहीं कर रहे हैं।