चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण शुक्रवार को दोपहर ढाई बजे प्रस्तावित है। इस मिशन के तहत लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर 23 या 24 अगस्त को उतारा जा सकता है। प्रक्षेपण को लेकर मंगलवार को पूर्वाभ्यास किया गया। बृहस्पतिवार को उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर मिशन की तैयारी का विश्लेषण पूरा कर लिया गया है। इसरो के बोर्ड ने भी प्रक्षेपण की अनुमति दे दी है।
चंद्रयान-2 मिशन में लैंडर भी शामिल था
पृथ्वी की 5 से 6 परिक्रमा करेगा चंद्रयान-3
प्रक्षेपण के बाद चंद्रयान-3 पृथ्वी की 5 से 6 दीर्घ वृत्ताकार परिक्रमाएं करेगा। इस दौरान यह पृथ्वी से 170 किमी तक निकट और 36,500 किमी तक दूर जाएगा। इससे वह वेग हासिल करेगा जो उसे अगले करीब 1 महीने की यात्रा के लिए जरूरी है। वह चंद्रमा की 100 किमी ऊंची कक्षा तक पहुंचेगा। चंद्रमा पर भी दीर्घ वृत्ताकार परिक्रमाएं करने के बाद एक निर्धारित स्थिति हासिल करेगा। इसके बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
मिशन 10 चरणों में बंटा
16 मिनट बाद अलग होगा प्रोपल्शन मॉड्यूल
पृथ्वी से प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद मिशन का प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) अपने भीतर मौजूद चंद्रयान-3 सहित रॉकेट से अलग हो जाएगा। आगे यही मॉड्यूल चंद्रमा की ओर बढ़ेगा। वह चांद की सतह पर लैंडर को उतारने के लिए चंद्र परिक्रमा पथ पर पहुंचेगा और लैंडर को अपने से अलग करेगा।
रोचक तथ्य
प्रक्षेपण 14 जुलाई को ही क्यों?: साल के इस समय पृथ्वी व चंद्रमा बाकी समय की तुलना में करीब होंगे। चंद्रयान-2 भी इसी वजह से 22 जुलाई 2019 को प्रक्षेपित हुआ था।