छोटे एवं मंझोले उद्योग को कारपोरेट टैक्स के मसले पर राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तरफ से बड़ी घोषणा हुई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों का कारोबार वर्ष 2015-16 में 50 करोड़ रुपये की सीमा के अंदर रहा है लेकिन वर्ष 2016-17 अथवा बाद के वर्ष में उनका कारोबार 50 करोड़ रुपये की सीमा को पार कर जाता है, तो ऐसी स्थिति में भी उन्हें 30 फीसदी की बजाय 25 फीसदी की दर से ही कारपोरेट टैक्स भरना होगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 के बजट में लघु एवं मंझोले उद्योग के लिए कर की दर वर्तमान 30 फीसदी से घटा कर 25 फीसदी करने की बात है, बशर्ते उसका कारोबार 50 करोड़ रुपये की सीमा के अंदर रहता है।
सीबीडीटी के अध्यक्ष सुशील चंद्रा ने सोमवार को यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में कहा कि इस वर्ष जिन कंपनियों का कारोबार 50 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है, लेकिन एक साल पहले उनका कारोबार 50 करोड़ रुपये की सीमा के अंदर था, तो उन्हें भी 25 फीसदी की प्रत्यक्ष कर की दर का लाभ मिलेगा। आयकर विभाग इस बारे में जल्द ही स्पष्टीकरण जारी करेगा।