दुनिया में बैड लोन या एनपीए के मामले में भारत यूरोपीय देश इटली के बाद दूसरे स्थान पर है। इटली में जहां बैंकों के कुल कर्ज का 14.4 फीसदी हिस्सा बैड लोन या एनपीए हो गया है, वहीं भारत में यह अनुपात 11.6 फीसदी है। हालांकि, भारतीय परिपेक्ष्य में देखें तो यहां कुल एनपीए का 90 फीसदी हिस्सा सिर्फ सरकारी बैंकों पर आता है।
घरेलू कर्ज हुआ दोगुना
आरबीआई के हालिया आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में कॉरपोरेट लोन के डिफाल्ट होने से उन पर बैंकों का भरोसा कम हुआ और घरेलू कर्ज में तेजी आई। वित्त वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में घरेलू कर्ज करीब दोगुना बढ़ गया है। इससे पहले के तीन वित्त वर्षों में घरेलू कर्ज बेहद मामूली स्तर से बढ़ा था लेकिन पिछले वित्त वर्ष में यह खुदरा कर्ज सबसे तेजी से बढ़ा
सबसे ज्यादा बढ़ा पर्सनल लोन
पिछले छह वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा तेजी पर्सनल लोन के मामलों में आई है। वित्त वर्ष 2013-14 में कुल पर्सनल लोन 2 लाख करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 5.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह, होम लोन का आंकड़ा 2013-14 के 5.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 10.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है। क्रेडिट कार्ड लोन में भी बड़ा इजाफा हुआ और यह 2013-14 के 24,860 करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 85,300 करोड़ रुपये हो गया है।