प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को कोविड-19 से जंग में लोगों से शंख, ताली बजाने की अपील की थी। दो दिन पहले वह फिर जनता से पांच अप्रैल की रात नौ बजे 9 मिनट के लिए दीया जलाने की अपील कर गए। राजनीति पर लगातार नजर रख रहे विश्लेषक राजीव शर्मा का कहना है कि 22 मार्च और पांच अप्रैल की अपील के बीच में राजनीतिक दलों के सुर बदल गए।
फरवरी-मार्च के महीने में राहुल गांधी कोविड-19 से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की नीति पर करारा हमला बोल रहे थे। अभी संयत चल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने मार्च में प्रधानमंत्री की कोविद-19 से लड़ने के लिए प्रयासों की तारीफ की। हफ्ते के अंत में लॉकडाउन के तरीके को लेकर हमला बोला। राजीव शर्मा का कहना है कि तब प्रधानमंत्री सही थे तो अचानक गलत कैसे हो गए?
बड़ा सवाल है। यह कांग्रेस पार्टी के असमंजस को दिखाता है। राजीव शर्मा का कहना है कि 22 मार्च को शाम पांच बजे लोगों ने जो उत्साह दिखाया, उससे पांच अप्रैल की प्रधानमंत्री की अपील ने राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया। राजीव इस बात की ओर भी ध्यान दिलाते हैं कि देश में मास्क, वेंटिलेटर सबकी भारी कमी है, डॉक्टर, नर्स सब परेशान हैं, लेकिन राजनीतिक दल इस मुद्दे को और सरकार की खामियों को ढंग से नहीं उठा पा रहे हैं।
इस विश्लेषण पर एक समाजवादी नेता का कहना है कि कोविड-19 के संक्रमण की आशंका में लोग भयग्रस्त हैं। प्रधानमंत्री अपनी कमजोरी छिपाने के लिए दीया जलाने का अभियान चलाकर लोगों के भय का राजनीतिक लाभ ले रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल इस तरह की आपात स्थिति में राजनीति नहीं करना चाहते।
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव अक्सर कहा करते हैं कि देश में लोक विरुद्ध जो भी राजनीतिक दल व्यवहार करेगा, जनता उसे नकार देगी। लोगों का ध्यान ऐसे समय में ममता बनर्जी पर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इस बार कोई करारा राजनीतिक बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिसे अच्छा लगता हो, दीया जलाए।
बसपा, सपा समेत किसी अन्य दल की तरफ से कोई कड़ी राजनीतिक टिप्पणी नहीं आई। वाईएसआर कांग्रेस के नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कोविड-19 से जंग में केवल तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराए जाने पर तंज कसा। भाजपा के प्रवक्ता नलिन कोहली ने दीपक जलाने को जहां आशा, उम्मीद, नई ऊर्जा के संचार का दीपक कहा, वहीं कांग्रेस की प्रवक्ता सुष्मिता देव इसे चिराग तले अंधेरा करार देती हैं।
सुष्मिता देव के अनुसार यह प्रधानमंत्री का स्काईवॉक है। जद(एस) के एचडी कुमारस्वामी प्रधानमंत्री के प्रयास को राजनीतिक करार देते हैं। उनका कहना है कि छह अप्रैल को भाजपा का स्थापना दिवस है और उसकी पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री ने यह राजनीतिक दांव चला।
प्रधानमंत्री ने कोविड-19 से जंग में 5 अप्रैल को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा देवी सिंह पाटील, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एचडी देवेगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से टेलीफोन पर चर्चा की। सहयोग मांगा। इसी तरह से वह अन्य नेताओं, समाज के विभिन्न वर्गों, कूटनीतिज्ञों, नौकरशाह, राज्यों के सीएम आदि सभी से चर्चा कर चुके हैं।
गुजरात में प्रधानमंत्री के साथ लंबे समय तक काम कर चुके एक पूर्व नौकरशाह का कहना है कि मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी वह सबको साथ लेकर चलने की नीति का एहसास जनता को कराते रहे हैं। वह जनता की नब्ज समझते हैं। राजीव शर्मा इसे प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा दांव मानते हैं।