लॉकडाउन की शुरूआती गलतियों से सीखते हुए प्रशासन ने रविवार शाम को जरूरी चीजों की सप्लाई व्यवस्था चालू रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे अब राशन, फल-दूध, सब्जी और दवाओं की सप्लाई चालू हो गई है।
सोमवार रात से लगभग 25 लाख ट्रक जरूरी सामानों की सप्लाई में जुड़ जाएंगे, लेकिन मजदूरों और ड्राइवरों के पलायन के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवस्था अभी भी डगमगा रही है। इससे आने वाले दिनों में कई जरूरी चीजों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि सामान्य व्यवस्था बहाल होने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है।
दवाओं की उपलब्धता पर अभी असर नहीं
मजदूरों के पलायन के कारण दवाओं की उपलब्धता पर भी आने वाले दिनों में असर पड़ सकता है। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच सभी ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को रोकने से दवाओं की उपलब्धता पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था। दवा कम्पनियों में काम कर रहे कर्मचारियों को भी पास न होने की स्थिति में काम पर जाने से रोका जा रहा था। लेकिन केमिस्ट एसोसिएशनों की अपील पर इन्हें इजाजत मिल गई और यह व्यवस्था चालू हो गई।
आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के संगठन सचिव संदीप नांगिया ने अमर उजाला को बताया कि सामान्य तौर पर सभी दवा कम्पनियों के पास 45 से 90 दिनों का स्टॉक उपलब्ध होता है।
इसलिए उत्पादन में कुछ असर पड़ने से भी जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर जल्दी में कोई असर पड़ने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। इसलिए दवाओं की उपलब्धता को लेकर अभी कोई संकट नहीं है। लेकिन दवाओं की सप्लाई के मामले में उन्हें भी ड्राइवर और मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
सामान चढ़ाने-उतारने को हमाल नहीं
आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अधिकारी हरीश सब्बरवाल ने बताया कि उनके 90 लाख ट्रकों में इस समय लगभग 10 लाख ट्रक जरूरी सेवाओं के ट्रांसपोर्टशन में लगे हैं। लेकिन सोमवार रात से 25 लाख ट्रक जरूरी सामान की सप्लाई में लग जाएंगे। सरकार ने इन्हें चलाने की अनुमति दे दी है।
लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच ड्राइवर और मजदूर अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतित हैं और वे काम पर नहीं आ रहे हैं। सुरक्षा को खतरे के कारण कई जगहों पर ड्राइवरों ने गाड़ियों को सड़क पर ही छोड़ दिया।
इससे जरूरी सेवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। सब्बरवाल के मुताबिक अगर चीजें आने वाले दिनों में ठीक होती हैं तब भी सामान्य व्यवस्था बहाल होने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है।
राशन की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित करेगी सरकार
सरकार ने देश के हर गरीब परिवार तक तीन महीने का राशन पहुंचाने के लिए घोषणा कर दी है। लेकिन इन सामानों को पहुंचाने के लिए जिस ट्रांसपोर्ट का उपयोग किया जाना है, उन ट्रकों पर सामान चढ़ाने और उतारने के लिए जरूरी मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे राशन की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।
ऑनलाइन डिलीवरी करने वाली कंपनियों के पास भी अब सामान की कमी होने लगी है। सप्लाई करने वाले लड़कों और मजदूरों की कमी के कारण सामानों की सप्लाई में एक हफ्ते से 15 दिन तक का समय लगने लगा है। इससे भी समस्या गंभीर हो सकती है।