किसी भी स्वीकृत स्थलों पर परीक्षण शुरू करने के लिए संस्थान की 'आचार समिति' की मंजूरी लेना अनिवार्य है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), जो देश का बायोमेडिकल रिसर्च रेगुलेटर है, उसके द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, 'आचार समिति' के लिए आवश्यक है कि वह नैदानिक अनुसंधान की देखरेख करे और परीक्षण शुरू करने की अनुमति देने से पहले किसी भी स्वीकृत स्थल पर प्रस्ताव की गहन समीक्षा करे।
एम्स की 'आचार समिति' में 15 सदस्य हैं और इससे आवश्यक मंजूरी मिलने में लगभग 10-14 दिन लगने की उम्मीद है। डॉ राय ने बताया, प्रस्ताव कम से कम 200-300 पन्नों का होगा और इसके ठीक से गुजरने में समय लगता है। विचार यह है कि अंतराल की समीक्षा की जाए और देखा जाए कि सभी चिंताओं का इसमें समाधान हो।
पहले और दूसरे चरण के परीक्षणों के लिए डॉ राय की टीम ने 30 जून को समिति को प्रस्ताव प्रस्तुत किया था और इसे 18 जुलाई को मंजूरी मिली। 'आचार समिति' से मंजूरी मिलते ही आगामी तीसरे चरण के परीक्षण के लिए एम्स 2,000 से 5,000 प्रतिभागियों को भर्ती करने की योजना बना रहा है।