देवेंद्र के हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर तो आया गया, लेकिन उसे करीब 1300 किलोमीटर दूर वैशाली, गाजियाबाद समय पर पहुंचाना भी पहाड़ जैसा था। इसके लिए देवेंद्र ने अपने एक परिचित से कार मांगी और रविवार दोपहर को खुद ही ड्राइव करते हुए वैशाली गाजियाबाद के लिए निकल पड़े। रास्ते में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर चेकिंग के दौरान उनसे सवाल भी किए गए। इस पर उन्हें बताना पड़ा कि उनकी दोस्त की जिंदगी का सवाल है। करीब 24 घंटे बाद सोमवार को वे अपने दोस्त राजन के पास पहुंच गए। राजन सांसों के लिए संघर्ष कर रही रहे थे कि दोस्त ने सही समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाकर उसकी जान बचा ली। अब राजन की हालत पहले से बेहतर है।
बता दें कि देवेंद्र और राजन दोनों ही बोकारो में साथ पले बढ़े। आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली आ गए। यहां संजय सक्सेना ने दोनों के लिए केयरटेकर की भूमिका निभाई थी। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद देवेंद्र इंश्योरेंस और राजन आईटी सेक्टर में जॉब करने लगे।दोनों की उम्र 34-34 साल है। राजन अपनी पत्नी के साथ नोएडा में रहते हैं जबकि अविवाहित देवेंद्र राची में कार्यरत है। दोनों के परिवारों के बाकी सदस्य अब भी बोकारो में रहते हैं। देवेंद्र का अब यही कहना है कि जब तक उनका दोस्त पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, वो बोकारो नहीं लौटेंगे। वाकई ये दोस्ती बेमिसाल है।