डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के छह डॉक्टर और चार नर्सों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सेना के एक डॉक्टर के भी कोरोना के संक्रमण में आने की खबर आई है। इसके अलावा दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक के बदरपुर और दिलशाद गार्डन के दो डॉक्टरों के भी कोरोना संक्रमित होने का मामला सामने आ चुका है।
कोरोना संक्रमित व्यक्ति का पता चलने पर उसे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली एंबुलेंस भी पूरी तरह सुरक्षित रहे, इसका लगातार ध्यान रखा जा रहा है। ड्राइवर सहित इन एंबुलेंस में काम कर रहे सभी स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट्स में सुरक्षित रहते हैं। इस तरह संक्रमित व्यक्ति से उन्हें कोई संक्रमण नहीं हो पाता है।
दूसरे, एंबुलेंस को भी रोजाना सैनिटाइज किया जा रहा है। ड्यूटी के पहले और बाद में इन वैन को पूरी तरह संक्रमण रहित किया जाता है।
दिल्ली के डॉक्टरों और नर्सों को संक्रमण से बचाने के लिए सभी सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक सभी लोगों को डिस्पोजेबल पीपीई किट्स दी जा रही हैं।
इससे कोरोना वायरस का स्वास्थ्यकर्मियों के कपड़ों से संक्रमण फैलने का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। इन्हें जिन अस्पतालों में रखा जा रहा है, वहां भी इन्हें विशेष तरीकों से रखा जा रहा है जहां संक्रमण की गुंजाइश पूरी तरह खत्म कर दी जाती है।
इन स्वास्थ्यकर्मियों को राजधानी के दो बड़े पांच सितारा होटलों में जिन कमरों में रखा जा रहा है, उनमें पूरी व्यवस्था मौजूद रहेगी। उन्हें अगले 14 दिन तक उनके कमरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी। यहां तक कि वे किसी दूसरे व्यक्ति का चेहरा तक नहीं देख सकेंगे।
बंद कमरों में उन्हें भोजन भी बेहद सुरक्षित तरीके से गेट के नीचे से उपलब्ध कराया जाएगा। दिन में केवल एक बार कमरे की सफाई की व्यवस्था के लिए गेट खोलने की इजाजत होगी।
लेकिन इन कमरों की सफाई करना वाला भी दक्ष स्वास्थ्यकर्मी ही होगा। सफाई के दौरान वह भी पीपीई किट्स पहने होगा, यानी इस दौरान भी वह न तो किसी दूसरे को संक्रमित कर सकेगा और न ही वह स्वयं किसी संक्रमण का शिकार होगा।
इन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ज्यादातर समान डिस्पोजेबल कैटेगरी का होगा। इन सामानों को भी बायो वेस्ट कचरे की तरह निबटान किया जाएगा। इन कचरों को सुरक्षित माहौल में ले जाकर जला दिया जाएगा, जबकि तौलिया जैसे सामानों को विशेष रासायनिक घोल में एक घंटे तक डुबाकर रखा जाता है जिससे ये संक्रमण मुक्त हो सकें।
उसके बाद ही इन्हें दुबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान कमरों की सफाई भी विशेष विधि से की जाती है। कमरों के हैंडल, बार या किसी स्टैंड को भी संक्रमण मुक्त किया जाता है।
इंडिया मार्ट से वेल्ड्स एंड प्रोटेक्शन कंपनी के शीर्ष अधिकारी हाजिम के मुताबिक पीपीई किट्स किसी भी संक्रमणयुक्त माहौल में काम करने वाले व्यक्तियों को संक्रमण होने से बचाने के लिए विशेष तरीकों से बनाया जाता है।
इसे पहनने के बाद शरीर का कोई भी अंग संक्रामक पदार्थ के सीधे संपर्क में नहीं आता है। किट्स बनाने में विशेष कपड़ों, रबर और डिस्पोजेबल पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।
आज के बाजार में यह पांच सौ रुपये से लेकर 1500 रुपये तक में उपलब्ध होता है। इसके आलावा स्वास्थ्यकर्मी सैनिटाइजर और अन्य तरीकों से अपने अंगों को संक्रमण से बचाने की कोशिश भी करते हैं।