वहीं, इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नदारद रहे। हालांकि पाक पीएम ने अपनी जगह स्वास्थ्य मामलों पर विशेष सहायक जफर मिर्जा को कांफ्रेंसिंग में भाग लेने के लिए भेजा।
यहां भी एक बार फिर पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कोरोना वायरस पर मदद के लिए बोलने के बजाय कश्मीर का राग अलापना उपयुक्त समझा। माना जा रहा था कि पाकिस्तान की तरफ से भेजे गए प्रतिनिधि दक्षेस सम्मेलन में कोरोना वायरस पर बात चीत करेंगे लेकिन वह कश्मीर पर ही चर्चा करने लगे।
मिर्जा ने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू कश्मीर में छह महीनों से ज्यादा समय से पाबंदी लागू है। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसलिए मैं भारत से कहना चाहूंगा कि वह कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए जम्मू कश्मीर पर लगी पाबंदियों को हटाए।
जफर मिर्जा ने संबोधन में कहा कि कोरोना वायरस फैलने के मद्देनजर उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए कोई भी देश मुंह नहीं मोड़ सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करनी चाहिए और सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए।
जफर मिर्जा ने कहा कि दुनियाभर में 1,55,000 से अधिक लोगों के संक्रमित होने, 5833 मौतें और 138 देशों में फैल चुके कोरोना वायरस से कोई भी देश और दुनिया का कोई भी क्षेत्र अनुत्तरदायी नहीं हो सकता है।
मिर्जा ने कहा कि दक्षिण एशिया को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस की क्षमता पर पाकिस्तान साझा चिंता व्यक्त करता है। हमारे सभी देशों ने मामलों की पुष्टि की है। किसी भी शालीनता के लिए कोई जगह नहीं है। सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करते हुए हमें सबसे खराब के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि हमने अपने सभी शिक्षण संस्थानों को तीन सप्ताह के लिए बंद करने, दो सप्ताह के लिए संपूर्ण पश्चिमी सीमा को बंद करने, केवल तीन हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रतिबंधित करने और सभी बड़े सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
इमरान के सहायक ने कहा कि हमारा मानना है कि सार्क सचिवालय हमें एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो हमें एक साथ ला सकता है और हमारा मानना है कि हमें संसाधनों के उच्चतम प्रयोग के लिए इस मंच का उपयोग करने की आवश्यकता है।
सरकार के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के कश्मीर राग पर भारत ने कहा है कि सार्क संगठन बहुत पुराना है। ये आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सार्क नेताओं को साथ लाया है। अगर इससे कोई अन्य पहल हो सकती है, जो कहना मुश्किल है। पाकिस्तान की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई, यह दिखाता है कि वे क्या हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने सार्क देशों को संबोधित किया। अपने संबोधन में मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि मैं भी अपना संबोधन कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई इस कांफ्रेंसिंग के लिए उन्हें धन्यवाद देकर शुरू करूंगा। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने आप में वायरस का मुकाबला करने में सफल नहीं हो सकता है।
राष्ट्रपति सोलिह ने कहा कि मालदीव भारत से सहायता प्राप्त करने के लिए भाग्यशाली रहा है और मैं पीएम मोदी और भारत के लोगों की अपने सरकार की तरफ से सराहना करता हूं।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि मैं पीएम मोदी को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने यह पहल की। मैं भारतीय छात्रों के साथ वुहान (चीन) से हमारे 23 छात्रों को लाने और उनकी मेजबानी करने के लिए उन्हें धन्यवाद देती हूं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी स्तर पर इस वार्ता को जारी रखने के लिए, हमारे स्वास्थ्य मंत्रियों, स्वास्थ्य सचिवों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को विशिष्ट चर्चा करने के लिए इस तरह के वीडियो सम्मेलनों का आयोजन करना चाहिए।
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटभया राजपक्षे ने सार्क देशों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने यह पहल की जहां हम अपने अनुभवों, विचारों, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर चुनौतियों को समझ और उनपर उठाए जाने वाले उपायों पर चर्चा कर सकें।
उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था ने गंभीर झटका लगा है, विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र जो पिछले साल हमारे देश पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद ठीक हो रहा था। मैं सार्क नेताओं को हमारी अर्थव्यवस्थाओं को कठिन दौर से निपटने में सहायता करने के लिए तंत्र तैयार करने की जोरदार सलाह देता हूं।
सार्क वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि हमें कोरोनावायरस से लड़ने के लिए टेली-मेडिसिन के लिए एक सामान्य ढांचा तैयार करना चाहिए। सीमाओं के बंद होने से भोजन, दवाओं और बुनियादी वस्तुओं की उपलब्धता की महत्वपूर्ण समस्या हो जाएगी।
अफगान राष्ट्रपति ने कहा कि जैसा की हम जानते हैं कि भारत सार्क और शंघाई सहयोग संगठन दोनों का हिस्सा है, इसलिए वह सार्क और शंघाई सहयोग संगठन के बीच समन्वय स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे चीन द्वारा कोरोना से लड़ने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मिलेगी, साथ ही हम चीन के अनुभवों से सीख सकेंगे।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि मैं इस महत्वपूर्ण और समयबद्ध पहल के लिए पीएम मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हमारा सामूहिक ज्ञान और प्रयास हमें सार्क क्षेत्र के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।
भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने कहा कि हम सभी को एक साथ लाने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहिए क्योंकि हर समय एकजुटता की आवश्यकता होती है, लेकिन जब दुनिया एक आम बीमारी से लड़ रही है, तो यह हमारे मतभेदों को पीछे छोड़ने के लिए बहुत अच्छा है।
गौरतलब हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस से निपटने के लिए सार्क देशों का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि सार्क देशों के नेतृत्व में इससे लड़ने के लिए एक मजबूत रणनीति बनाई जाए। सार्क देशों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की काफी सराहना की गई।
सार्क देशों के प्रतिनिधियों ने उनके इस फैसले का स्वागत करते हुए साथ खड़े रहने की बात कही थी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि इस वायरस से लड़ने के लिए एक मजबूत रणनीति बनाई जाए। इससे हम दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा था कि हमारी धरती कोरोनावायरस से जूझ रही है। विभिन्न स्तरों पर, सरकारें और लोग इसका मुकाबला करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। वैश्विक आबादी की एक महत्वपूर्ण संख्या का घर दक्षिण एशिया को यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए कि हमारे लोग स्वस्थ हैं।
उन्होंने कहा था कि मैं प्रस्ताव करना चाहूंगा कि सार्क देशों के नेतृत्व ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए एक मजबूत रणनीति बनाई जाए। हमारे नागरिकों को स्वस्थ रखने के तरीकों के बारे में हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे हम दुनिया के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं और धरती को स्वस्थ रखने में योगदान दे सकते हैं।