सुप्रीम कोर्ट में कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सोमवार को एक याचिका दायर कर केंद्र और सभी राज्यों को 50 साल से अधिक उम्र के कैदियों, खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, श्वसन समस्या और अन्य बीमारियों से पीड़ित कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत देने पर विचार करने की मांग की गई।
याचिका में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, बूढ़े व्यक्तियों और उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों जैसे पहले से मौजूद चिकित्सा स्थितियों से पीड़ित लोग वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
अधिवक्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने वायरस के प्रकोप के बाद जेलों में भीड़भाड़ के बारे में पहले ही संज्ञान ले लिया है, लेकिन 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों सहित कुछ लोगों की श्रेणी के मुद्दे को पहले इसके संज्ञान में नहीं लाया गया था।
23 मार्च को शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे कोरोना वायरस के मद्देनजर जेलों में सात साल की जेल की अवधि के लिए सजा काट रहे अपराधियों के लिए पैरोल या अंतरिम जमानत पर विचार करने के लिए उच्च-स्तरीय समितियों का गठन करें।
साहनी ने अपनी याचिका में कहा है कि 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का कोरोना वायरस से प्रभावित होने का अधिक खतरा है। याचिका में कहा गया है कि मधुमेह, सांस की समस्या, गुर्दे की बीमारी और अन्य जानलेवा बीमारी वाले लोग भी कोविड-19 के शिकार हो सकते हैं और इसका प्रभाव ऐसे व्यक्तियों पर भी पड़ सकता है।
याचिका में कहा गया है कि चूंकि यह मामला शीर्ष अदालत के समक्ष नहीं लाया गया था, इसलिए 50 साल से अधिक उम्र के कैदियों और चिकित्सीय स्थिति वाले जेल कैदियों के बारे में कोई निर्देश पारित नहीं किए गए थे और अधिकारी उन्हें पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार नहीं कर रहे थे।
16 मार्च को, शीर्ष अदालत ने देश भर की जेलों की अधिक भीड़ के बारे में संज्ञान लेते हुए मुकदमा दायर किया था और कहा था कि जेल में बंद कैदियों के लिए कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखना मुश्किल है।