केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस के कारण देश में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 724 लोग संक्रमित पाए गए हैं। वहीं, पिछले 24 घंटों में 75 नए मामले सामने आए हैं, जबकि इनमें से चार की मौत हुई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि हमने 10,000 वेंटिलेटर बनाने के लिए एक पीएसयू को आदेश दिया है। साथ ही भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) से भी एक से दो महीने के अंदर 30,000 अतिरिक्त वेंटिलेटर खरीदने का अनुरोध किया गया है। हमारे अनुरोध पर लगभग 1.4 लाख कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा है।
अस्पतालों में ओपीडी बंद होने के को लेकर कहा कि हमने टेली-मेडिसिन सुविधा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, मरीजों से अनुरोध है कि वे उसका लाभ उठाएं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि हमें सावधान रहना होगा, लॉकडाउन और सामाजिक मेलजोल में कमी को शिद्दत से अपनाना होगा, क्योंकि अगर एक भी व्यक्ति कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करता है तो हमारे सभी प्रयास मिट्टी में मिल जाएंगे।
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन, पानी और स्वच्छता की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है। होटल और किराए के आवास सभी कोरोना वायरस से सावधानियां बरतते हुए खुले और कार्यात्मक रहने चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात भी की है। बता दें कि 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही कई मजदूर दूसरे राज्यों से अपने घरों को लौट रहे हैं।
श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र गृह सचिव अजय भल्ला ने भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकारियों से श्रमिकों को खाना और भोजन उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
बता दें कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि लोग कई सौ किलोमीटर का सफर या तो किसी वाहन से या फिर पैदल ही तय कर रहे हैं। इस दौरान रास्ते में होटल आदि ना खुले होने से उनके सामने खाने की समस्या भी है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के आर गंगा केतकर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा शुरू की जा रही एकजुटता परीक्षण में जल्द ही अपनी भागीदारी शुरू करने की संभावना है। पहले हमने ऐसा नहीं किया क्योंकि हमारी संख्या बहुत कम थी।