बाराकुडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना वायरस को लेकर तीन तरह के ई-मेल भेजे जा रहे हैं जिनमें स्कैमिंग, ब्रांडेड और बिजनेस ई-मेल शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि केवल मार्च में भेजे गए ई-मेल में से 54 फीसदी स्कैम, 34 फीसदी ब्रांड के नाम पर, 11 फीसदी ब्लैकमेल और 1 फीसदी बिजनेस कंप्रोमाइज ईमेल शामिल हैं। वहीं मार्च 17 को 77 फीसदी स्कैम ई-मेल भेजे गए हैं। ऐसे ई-मेल भेजकर हैकर्स का मकसद लोगों की बैकिंग संबंधी जानकारी चोरी करना है। इसके अलावा मैलवेयर के जरिए लोगों के सिस्टम को हैक करना भी शामिल है।
स्कैम- स्कैम ई-मेल के जरिए लोगों को फ्री मास्क, फ्री सैनेटाइजर देने के दावे वाले ई-मेल भेजे जाते हैं। इसके अलावा लोगों को ऐसे ई-मेल भी भेजे जाते हैं जिनमें वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों में निवेश करने को कहा जाता है, जबकि वास्तव में ये कंपनियां फर्जी होती हैं। इसके अलावा लोगों से फर्जी डोनेशन भी मांगे जाते हैं। वहीं चैरिटी वाले ई-मेल भी आते हैं।
मैलवेयर- कोरोना वायरस से संबंधित ई-मेल में कई तरह के मैलवेयर एक मीडिया फाइल के जरिए भेजे जा रहे हैं। उदाहरण से समझें तो आपके पास ऐसा कोई ईमेल आ सकता है जिसमें एक फाइल अटैच होगी और उसे डाउनलोड करने को कहा जा रहा होगा। फाइल को डाउनलोड करते ही आपके सिस्टम के हैक होने की संभावना है। इस तरीके से आपके फोन में बैकिंग मैलवेयर इंस्टॉल किए जा सकते हैं और शिकार बनाया जा सकता है।
निजी जानकारी की चोरी
कोरोना के नाम पर ऐसे भी ई-मेल आ रहे हैं जिनमें किसी बड़ी कंपनी के हवाले से वेब पेज का लिंक भेजा जा रहा है। लिंक पर क्लिक करते ही एक वेब पेज खुलता है। इसके बाद आपसे निजी जानकारी मांगी जाती है। उदाहरण के तौर पर आप ऊपर की फोटो को देख सकते हैं।
अब सवाल यह है कि ई-मेल आप बंद तो कर नहीं सकते तो फिर इनसे बचने का तरीका क्या है। पहला काम यह है कि किसी भी ऐसे ई-मेल में दिए गए अटैचमेंट पर क्लिक ना करें जो कोरोना वायरस से संबंधित हो या फिर अंजान ई-मेल आईडी से आया हो। इसके अलावा किसी भी ई-मेल के साथ आए लिंक को ओपन ना करें और मीडिया फाइल को भी डाउनलोड ना करें। दूसरा तरीका है कि ऐसे ई-मेल को ब्लॉक करें, फ्लैग करें या फिर स्पैम मार्क कर दें। कुल मिलाकर कहें तो आपको ऐसे ई-मेल से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है, नहीं तो दान-पुण्य के चक्कर में बहुत नुकसान हो जाएगा।