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कोरोना की एक चुभन ये भी, जिससे आया सुरक्षा बलों की जिंदगी में बदलाव

Sat, 11 Apr 2020 07:54 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • बैरक में चहल-पहल बंद, चाय की मस्ती भी गायब... 
  • एके-47 से पहले मास्क और दस्ताने उठाए जाते हैं... 
  • मनोरंजन कक्ष में पसरा रहता है सन्नाटा
  • अभी सुबह की पीटी परेड या ट्रेनिंग सब बंद हैः एम. दिनाकरण
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CRPF Jawans Awareness Session - फोटो : Social Media (File)
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विस्तार
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कोरोना की चुभन सुरक्षा बलों को एक अलग ही तरह से हो रही है। बॉर्डर पर ड्यूटी, कश्मीर में आतंकियों या नक्सलियों के खिलाफ किसी बड़े ऑपरेशन में यह चुभन सुरक्षा बलों को परेशान कर रही है।

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आपसी निकटता और खुलापन दो माह पहले तक इनकी ताकत और रणनीति का एक बड़ा हिस्सा था। अब कोरोना की लड़ाई, इन जवानों की जिंदगी में एक बदलाव ले आई है। ये कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल पाते। मेस में एक साथ बैठकर हंसी-मजाक के बीच खाना नहीं खा सकते।

चुपचाप अपनी थाली लेकर इधर-उधर हो जाओ। मनोरंजन कक्ष सूना पड़ा है। सामुदायिक भावना पर आधारित ये सुरक्षा बल एक नई परिस्थिति के दायरे में आते जा रहे हैं। आसपास के लोगों से मिलना जुलना सब बंद हो गया है।
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कोरोना की लड़ाई में अन्य एजेंसियों के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल भी अपना योगदान दे रहे हैं। इस लड़ाई का हिस्सा बनने से पहले इनकी जिंदगी कुछ अलग तरह की थी।

सुबह-शाम पीटी परेड होती तो उसमें सभी साथ रहते थे। कई तरह की ट्रेनिंग और रिफ्रेशर कोर्स में निकटता कायम रही। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे बताते हैं कि इन सुरक्षा बलों की एक बड़ी ताकत सामुदायिक भावना होती है। एक साथ ड्यूटी देना, ट्रेनिंग करना और कभी कभार दंड भी एक साथ।

कोरोना के चलते जो सोशल डिस्टेंसिंग का पार्ट है, वह इन्हें बहुत चुभता है। ड्यूटी के दौरान या खाली समय में अगर कोई पान खा रहा है, किसी ने चने का पैकेट लिया तो वह आपस में बंट जाता था। जिस भी जवान की नजर पड़ती, वह खुद आकर ले लेता।

मेस में इतनी आवाज होती थी कि इन्हें चुप कराने के लिए ऑर्डर निकालने पड़ जाते थे। कोई अपने घर की बता रहा है तो कोई कहानी सुनाने में व्यस्त था। दूसरी ओर कई जवान ड्यूटी या विभाग की चर्चा आपस में कर रहे होते थे। अब सब बदला हुआ है।
 

ये सब नए तरीके से अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। हर जगह कोरोना का साया है। सामाजिक दूरी के साथ ही मास्क, दस्ताना और नियमित हैंड वॉश, अब ये इनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं।

बैरक में चहल-पहल बंद, चाय की मस्ती भी गायब

सुरक्षा बलों की बैरक में पहले वाली चहल-पहल अब गायब है। पहले दो तीन मीटर की दूरी पर बेड थे, अब वह दूरी और बढ़ गई है। डिनर के बाद मनोरंजन कक्ष में भीड़ जुटती थी, टीवी पर मैच, समाचार या गाने बजते थे, अब बिल्कुल बंद है।

कक्ष में सन्नाटा पसरा है। चाय सुबह की हो या दोपहर की, उस दौरान मस्ती होती थी। किसी के हाथ में बिस्कुट है तो वह दूसरे साथी की चाय में डुबोकर उसे खा लेता था। अब ऐसा हो गया है कि जैसे सब अनजाने से हैं।

बीएसएफ प्रवक्ता के मुताबिक, जवानों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिसरों के बाहर न जाएं। लोगों के साथ बातचीत न करें। बाहर निकलने से पहले मास्क और दस्ताने पहनने व सामाजिक दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

आबादी वाले इलाके में ड्यूटी है तो ये पाबंदियां और ज्यादा सख्त हो जाती हैं। बॉर्डर आउट पोस्ट हो या बैरक, हर जगह कोरोना से बचाव के पोस्टर लगे हैं। सर्वधर्म सभा या प्रार्थना भी बंद है।

एके-47 से पहले मास्क और दस्ताने उठाते हैं

एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट विनय ओझा बताते हैं कि अब जवानों एके-47 उठाने से पहले मास्क और दस्ताने उठाते नजर आते हैं। पहले सभी जवान पीपीई से लेस होते हैं, उसके बाद हथियार उठाते हैं। परिसरों में होने वाली सर्वधर्म सभा या प्रार्थना बंद हो गई है।

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडे का कहना है कि मेस में समय बढ़ा दिया गया है। जवानों को उसी टाइम टेबल में खाना लेना पड़ता है। इसके बाद वहां कोई नहीं बैठता। जवान खाना लेकर बैरक में या दूसरी किसी जगह पर चले जाते हैं।

बाहर खड़े होकर खाते हैं तो तीन मीटर की दूरी रहती है। सीआरपीएफ के डीआईजी एम. दिनाकरण का कहना है कि अभी सुबह की पीटी परेड या ट्रेनिंग सब बंद है। कोरोना के चलते जो दूरी बनाई गई है, वह कहीं न कहीं जवान को परेशान तो कर रही है।

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खैर, जवान अब ये समझ रहे हैं कि कोरोना से लड़ना है और दूसरों को बचाना भी है तो ये दूरी जरूरी है।

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