देश में कोरोना वायरस के सीमित सामुदायिक प्रसार के संकेत तो दो महीने पहले ही मिल चुके थे। हालांकि, भौगोलिक दृष्टिकोण से वायरस का सामुदायिक प्रसार सीमित हुआ है। यह खुलासा बीते चार जुलाई को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जारी दिशा-निर्देशों में हुआ है। जिनमें स्पष्ट लिखा है कि बीते अप्रैल माह में ही देश में कोरोना वायरस का सीमित सामुदायिक प्रसार देखने को मिला है। यहां तक लिखा गया है कि आगामी दिनों में यह महामारी कैसे सामने आएगी इसका अंदाजा भी नहीं है।
वहीं, आईसीएमआर के पूर्व महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर का कहना है कि पूरे देश में नहीं, लेकिन दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के इलाकों में स्थानीय प्रसार देखने को मिला है। उनका यहां तक कहना है कि पूर्णा पीक को लेकर भी अभी तक स्पष्ट अनुमान नहीं लगाया जा सकता। दरअसल, 11 जून को आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ कल बलराम भार्गव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के पहले सीरो सर्वे का परिणाम साझा करते हुए सामुदायिक प्रसार से इनकार किया था।
यह सर्वे मार्च और अप्रैल माह की स्थिति को लेकर था सीरो सर्वे के अनुसार, 0.73 फीसदी आबादी में कोरोना संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी शरीर में पाए गए। जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह लोग कोरोना की चपेट में आने के बाद ठीक भी हो गए। लेकिन इन्हें संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चला।
संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चलना भी संकेत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ही अनुसार, देश के ज्यादातर हिस्सों में मरीज मिलना, ज्यादातर मरीजों के संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चलना और ज्यादा मामलों की निगरानी में होना सामुदायिक प्रसार की ओर इशारा करता है। इससे पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी दिल्ली में सामुदायिक प्रसार की बात स्वीकार कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने बयान कहा कि राज्य नहीं बल्कि केंद्र की ओर से ही इसकी पुष्टि की जा सकती है।
मानसिक तनाव से बचने के लिए अपनी चिंता को साझा करें: केंद्र
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि मानसिक तनाव को दूर करने को लेकर जागरुकता बेहद जरूरी है, लोगों को अपनी चिंता को खुलकर साझा करना चाहिए। स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने राज्यों को पत्र लिखा है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक स्वस्थ वातावरण तैयार करने की दिशा में राज्यों को कार्य करना चाहिए।
पत्र में लिखा है कि कोविड महामारी के इस दौर में राज्यों के कार्य सराहनीय हैं। लेकिन यह गंभीर है कि हम खुलकर अपने मानसिक तनाव पर बात करें तनाव या चिंता के लक्षणों की पहचान जरूरी है। कोई भी व्यक्ति अपनी परेशानी या चिंता को जब तक आगे आकर साझा नहीं करेगा, तब तक उसकी मदद नहीं की जा सकती है। दरअसल भारत में हर सातवां व्यक्ति मानसिक परेशानियों से ग्रस्त है।