कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं भारत की बात की जाए तो मरीजों की संख्या 170 से ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने गुरुवार को वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर कोरोना के विषाणु के फैलने पर रोक नहीं लगाई जाती है तो लाखों लोग मर सकते हैं। ऐसे में लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल हैं। जिनके येल में सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान के स्टर्लिंग प्रोफेसर और चिकित्सक निकोलस ए क्रिस्टाकिस ने जवाब देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि परिस्थिति अस्थिर है लेकिन जानकारी इसमें बदलाव ला सकती है। उन्होंने इस वायरस से संबंधित कई मुद्दों पर जानकारी दी है।
बच्चों के स्कूल बंद होने से क्या फायदा
अमेरिका में रहने वाले निकोलस ने लिखा, कोविड-19 के कारण स्कूल बंद होना वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से एक मुश्किल विषय है। इसके फायदे का ठीक-ठीक पता लगाना कठिन है। स्कूल बंद होने से बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। मगर यह बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है। कई शोध से पता चला है कि बच्चों के घर में रहने से नतीजे बेहतर आए हैं। इससे वह किसी भी भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बच जाते हैं।
सामाजिक मेल-जोल से बढ़ता है वायरस
वायरस सामाजिक मेल-जोल से बढ़ता है। यह रोजाना एक निश्चित जनसंख्या में फैलता है जैसे कि कॉलेज। जहां कुछ लोगों के इस वायरस के संपर्क में आने का पता नहीं चल पाता है। वहीं ज्यादातर लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों के कारण इसकी चपेट में आते हैं।
बुजुर्ग, बेघर को रहता है सबसे ज्यादा खतरा
यह महामारी सबसे पहले कमजोर लोगों (बुजुर्ग, बेघर) को अपनी चपेट में लेते हैं। उन्हें इसके संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इन लोगों को हमारी देखभाल की जरुरत होती है। खासतौर से जो लोग डायलिसिस पर हैं उन्हें सबसे ज्यादा खतरा है क्योंकि वह वहां अपने साथियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में यदि कोई स्वास्थ्य कर्मी इस वायरस की चपेट में हैं तो उसके जरिए यह कई लोगों को अपनी चपेट में आसानी से ले सकता है। इसके अलावा उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है।