कोरोना महामारी के बढ़ते केस एक बार फिर चिंता का विषय बने हुए है। कुछ राज्यों में संक्रमण में इजाफा देखने को मिल रहा है तो कुछ राज्यों में हालात अभी काबू में है। कोविड की तीन लहर बीत जाने के बाद भी इस वायरस को लेकर लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वैज्ञानिक लगातार रिसर्च में लगे हुए है। हाल ही में नई शोध में सामने आया है कि कोरोना वायरस के लक्षण एक माह तक संक्रमित व्यक्ति के मुंह में मौजूद रह सकता है।
कोविड महामारी को लेकर हुई शोध के मुताबिक, कोविड के अधिकांश लक्षण नाक और गले, श्वसन मार्ग से संबंधित होते हैं। लेकिन इसका एक दुर्लभ लक्षण भी है जो कि मुंह से संबंधित है। इस लक्षण के बारे में बहुत कम रिपोर्ट अभी तक सामने आई हैं। हालिया शोध के मुताबिक, मुंह में दिखने वाला नया लक्षण चीभ से संबंधित होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार चीभ में दिखने वाला कोविड का यह लक्षण संक्रमण का शुरुआती संकेत हो सकता है।
कोरोना महामारी की शुरुआत में, स्पेन में शोधकर्ताओं ने एक पेपर प्रकाशित किया जिसमें बताया गया कि कोरोना के साथ अस्पताल में भर्ती लगभग एक चौथाई रोगियों के मुंह या जीभ में बदलाव आया था जिसमें कई लोगों के मुंह में छाले पाए गए थे। एक पुरुष रोगी पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि उसकी जीभ की सतह पर असामान्य उपस्थिति के साथ बुखार, हल्का सांस लेने में तकलीफ और अस्वस्थता के लक्षण थे। जर्नल ऑफ इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियडोनटोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, कोविड जीभ सबसे अधिक सामने आने वाले मौखिक लक्षणों में से एक है। जीभ में दानें पड़ने से जलन होने लगती है। मुंह के अंदर कई जगह पर अल्सर की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। लाल या सफेद पैच घाव बढ़ने लगते हैं। चीभ पर एक प्रकार की सफेद कोटिंग हो जाती है।
संक्रिमत व्यक्ति के मुंह के अंदर पाया जाने वाला कोरोना वायरस के इस लक्षण को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि, कई तरह की बीमारियां और संक्रमण जीभ की सतह में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं। यह लक्षण लंबे समय तक जीभ में रह सकता है। कोविड के दौरान जीभ पर छोटे छोटे दाने नजर आने लगते हैं और इसका रंग लाल हो जाता है। छोटे छोटे धब्बे बनने लगते हैं। इन छोटे-छोटे धब्बों से जीभ में दर्द और जलन महसूस होने लगती है और इसकी वजह से कुछ खाने और चबाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि,संक्रमित व्यक्ति के मुंह के अंदर कोशिकाओं के एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम -2 रिसेप्टर के लिए वायरस के बंधन के कारण हो सकता है। इसके अतिरिक्त यह कई तरह की दवाओं के इस्तेमाल की वजह से भी हो सकता है।